धनतेरस से भाई दूज तक पांचों पर्वों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्ता से रूबरू हुए विद्यार्थी, नृत्य-गीत और रंगोली से बिखेरी प्रतिभा की छटा
भारतीय त्योहार हमारी संस्कृति, परंपरा और संस्कारों के संवाहक-विजय बहादुर सिंह
आजमगढ़। धनतेरस के पावन अवसर पर एसकेडी ग्रुप के विद्यालयों एस के डी विद्या मंदिर, एसकेडी इंटर कॉलेज धनहुआं और एसकेडी लोटस वैली जहानागंज में पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व का हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ आयोजन किया गया। इस अवसर पर धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा एवं भाई दूज जैसे पांचों पर्वों की सांस्कृतिक एवं पारंपरिक महत्ता को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रबंधक विजय बहादुर सिंह द्वारा भगवान श्री गणेश एवं माता लक्ष्मी के विधिवत पूजन-अर्चन के साथ किया गया। इसके पश्चात उन्होंने विद्यार्थियों को पांचों पर्वों के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्व से विस्तारपूर्वक परिचित कराया। उन्होंने इन त्योहारों के प्रकृति, कृषि एवं कृषि उपज से जुड़े महत्व को समझाते हुए स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा पारंपरिक जीवन मूल्यों की उपयोगिता पर भी सरल एवं प्रेरणादायक शब्दों में प्रकाश डाला।
इस अवसर पर विद्यालय के विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। बच्चों ने नृत्य, गायन एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सुरक्षित दीपावली मनाने का संदेश देते हुए अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण विद्यार्थियों के मध्य आयोजित हाउस-वाइज रंगोली प्रतियोगिता रही, जिसमें प्रत्येक हाउस के प्रतिभागियों ने विद्यालय द्वारा निर्धारित थीम के अनुरूप आकर्षक, मनमोहक एवं रंग-बिरंगी रंगोलियों का निर्माण कर अपनी रचनात्मकता एवं कलात्मक प्रतिभा का परिचय दिया।
कार्यक्रम में विद्यालय के श्रीकांत सिंह प्राचार्य के.के. शरण , पी एन पाण्डेय, योगेश अस्थाना, दरक्षा खान सहित समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया तथा दीपावली एवं अन्य पर्वों के महत्व को बताते हुए बच्चों को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं प्रदान कीं।
इस प्रकार विद्यालय परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, परंपरा, कला एवं संस्कारों का सुंदर संगम बन गया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को न केवल अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया, बल्कि भारतीय त्योहारों के वास्तविक उद्देश्य, सामाजिक सद्भाव, स्वच्छता एवं प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी दिया।

