आजमगढ़ : भीषण बाढ़ में लापता हुए हवलदार उपेंद्र यादव की डीएनए जांच से हुई पहचान

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दो महीने बाद तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा शहीद जवान का पार्थिव शरीर, गमगीन माहौल में दी गई अंतिम विदाई
आजमगढ़। देश की सरहदों की रक्षा का संकल्प लेकर घर से निकले हवलदार उपेंद्र यादव की वापसी का इंतजार कर रहे परिवार को आखिरकार बुधवार को ऐसी खबर मिली, जिसने उनकी दुनिया उजाड़ दी। दो महीने तक बेटे के सकुशल लौटने की उम्मीद संजोए बैठे परिजनों को जब उनका पार्थिव शरीर मिला तो घर में कोहराम मच गया। जिस चौखट पर परिवार उनकी राह देख रहा था, उसी चौखट से उन्हें अंतिम विदाई देनी पड़ी।
जिले के सिधारी थाना क्षेत्र के मोहम्मदल्ला गांव निवासी हवलदार उपेंद्र यादव सेना की पांचवीं ग्रेनेडियर रेजिमेंट में तैनात थे। बीते 14 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली जिले में आई भीषण बाढ़ के दौरान वह लापता हो गए थे। इस प्राकृतिक आपदा में सेना के पांच जवान लापता हुए थे, जबकि दो जवानों को सुरक्षित बचा लिया गया था।
हादसे के बाद सेना की ओर से लगातार लापता जवानों की तलाश की जा रही थी। वहीं, उपेंद्र यादव के परिवार को उम्मीद थी कि वह सुरक्षित होंगे और एक दिन घर जरूर लौटेंगे। परिजन हर दिन उनकी सलामती की दुआ कर रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उपेंद्र यादव के भाई सत्येंद्र यादव ने बताया कि बाढ़ के बाद एक शव बरामद हुआ था, जिसके आधे हिस्से का डीएनए परीक्षण कराया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर शव की पहचान हवलदार उपेंद्र यादव के रूप में हुई। पहचान की पुष्टि होने के बाद परिवार को उनके निधन की सूचना मिली। बुधवार सुबह करीब 10 बजे जब उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव मोहम्मदल्ला पहुंचा तो पूरे गांव में मातम छा गया। परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो उठा। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। जवान के अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों की भारी भीड़ जुट गई। हर आंख नम थी और हर कोई देश के इस वीर सपूत को श्रद्धांजलि दे रहा था। दो महीने तक जिस परिवार ने बेटे की सलामती की उम्मीद नहीं छोड़ी, उसे बुधवार को भारी मन से अंतिम विदाई देनी पड़ी। हवलदार उपेंद्र यादव के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी शहादत से मोहम्मदल्ला गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त है।

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