कुमार सोनोग्राफी क्लीनिक पर गलत जांच रिपोर्ट देने का आरोप, पति ने सीएमओ से की शिकायत
आजमगढ़। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला एक सोनोग्राफी सेंटर की कथित लापरवाही से जुड़ा है, जहां गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट दिए जाने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस रिपोर्ट के कारण प्रसव के दौरान गर्भवती महिला और उसकी नवजात बच्चियों की जान संकट में पड़ गई। हालांकि, किसी तरह मां और दोनों बच्चियों की जान बच गई। मामला सगड़ी तहसील के महाराजगंज थाना क्षेत्र का है। यहां के निवासी शिवम ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ), आजमगढ़ को लिखित शिकायती पत्र देकर आसिफगंज स्थित कुमार सोनोग्राफी क्लीनिक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने क्लीनिक पर गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देने और जांच में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता शिवम के मुताबिक, उनकी पत्नी किरण देवी गर्भवती थीं। इसी दौरान उन्होंने आसिफगंज स्थित कुमार सोनोग्राफी क्लीनिक में अल्ट्रासाउंड कराया था। आरोप है कि क्लीनिक की ओर से दी गई रिपोर्ट में गर्भावस्था की सही स्थिति का उल्लेख नहीं किया गया। प्रसव के समय जब वास्तविक स्थिति सामने आई तो परिवार के लोग भी हैरान रह गए। महिला ने जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। शिवम का आरोप है कि यदि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में सही जानकारी दी गई होती तो परिवार और चिकित्सकों को प्रसव से पहले आवश्यक तैयारियां करने का पर्याप्त अवसर मिल सकता था। गलत रिपोर्ट के चलते प्रसव के दौरान मां और दोनों नवजात बच्चियों की जान खतरे में पड़ गई। हालांकि, काफी मुश्किलों के बाद तीनों की जान बच सकी। शिकायती पत्र में शिवम ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा है कि गलत रिपोर्ट और जांच में लापरवाही का खामियाजा उनके परिवार को भुगतना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी और दोनों बच्चियों की जान किसी तरह बच पाई। शिकायतकर्ता ने सीएमओ से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। आरोप सही पाए जाने पर कुमार सोनोग्राफी क्लीनिक के संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही क्लीनिक का लाइसेंस निरस्त करने की भी मांग की गई है, ताकि भविष्य में किसी अन्य गर्भवती महिला और उसके परिवार को ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े। इस शिकायत ने जिले में संचालित सोनोग्राफी सेंटरों की जांच और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर अल्ट्रासाउंड सेंटरों की नियमित जांच किस स्तर पर होती है? यदि किसी सेंटर से गलत रिपोर्ट दिए जाने की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच और जवाबदेही कैसे तय की जाती है? गर्भवती महिलाओं की सेहत और सुरक्षा से जुड़े ऐसे गंभीर मामलों में स्वास्थ्य विभाग कितनी तत्परता दिखाता है? फिलहाल शिकायतकर्ता ने सीएमओ से कार्रवाई की गुहार लगाई है। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्लीनिक पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

