अजमतगढ़ बीडीओ के आदेश के अवलोकन के बाद अदालत ने कहा- याचिकाकर्ता के तर्कों में प्रथम दृष्टया दम
इलाहाबाद हाईकोर्ट में 28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई, तीन दिन में डीएम को आदेश की जानकारी देने के निर्देश
आजमगढ़। जनपद के अजमतगढ़ क्षेत्र में अधिकारियों पर लगाए गए कथित अवैध रिश्वत मांगने के आरोप के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। रिट-सी संख्या 31611/2026, चंद्रशेखर शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं 4 अन्य की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत तर्कों को प्रथम दृष्टया आधारयुक्त माना है। अदालत ने जिलाधिकारी आजमगढ़ को मामले की रिपोर्ट अगली सुनवाई की तारीख पर सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई न्यायालय संख्या-1 में माननीय न्यायमूर्ति अजीत कुमार और माननीय न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सौम्य श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि शिकायत ऐसे व्यक्ति के संबंध में है, जिसके विरुद्ध अधिकारियों द्वारा कथित रूप से अवैध रिश्वत की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया है। अदालत को बताया गया कि संबंधित व्यक्ति का बयान प्रतिवादी अधिकारियों द्वारा दर्ज कराया गया था और उसी बयान के आधार पर अंततः शिकायत दर्ज की गई। याचिकाकर्ता का तर्क था कि मामले में प्रारंभिक स्तर पर तथ्यात्मक जांच कराई जानी चाहिए थी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि प्रकरण भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उचित कार्रवाई के लिए संदर्भित किए जाने योग्य है या नहीं। साथ ही, कथित रूप से दोषी अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जरूरत है या नहीं, यह भी जांच से स्पष्ट होना चाहिए। न्यायालय ने अजमतगढ़, आजमगढ़ के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) द्वारा पारित आदेश का अवलोकन किया। इसके बाद पीठ ने प्रथम दृष्टया माना कि याचिकाकर्ता की ओर से रखे गए तर्कों में दम दिखाई देता है। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी आजमगढ़ को निर्देश दिया है कि वह मामले की पूरी रिपोर्ट तैयार कर अगली सुनवाई की तारीख पर सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें। राज्य सरकार की ओर से उपस्थित स्थायी अधिवक्ता मुकुल त्रिपाठी को आदेश की जानकारी तीन दिनों के भीतर जिलाधिकारी आजमगढ़ को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। आदेश 18 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ द्वारा पारित किया गया।









