उपस्थिति पंजिका में न नाम मिला, न हस्ताक्षर; प्रधानाचार्य ने नियुक्ति और कार्यभार ग्रहण करने से किया इनकार
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में हुई सुनवाई, नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों के पालन का भी नहीं मिला प्रमाण
आजमगढ़। श्री महेश्वर संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रसूलपुर मठ गोमाडीह से जुड़े हर्षित गुप्ता की तदर्थ नियुक्ति और वेतन भुगतान के मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक ने बड़ा फैसला लिया है। डीआईओएस अजय कुमार ने तत्कालीन डीआईओएस द्वारा 30 सितंबर 2022 को जारी वेतन भुगतान की अनुमन्यता के आदेश को तत्काल प्रभाव से री-कॉल कर दिया है। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के चार नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में की गई। मामला रिट याचिका संख्या 11101/2025 हर्षित गुप्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य से संबंधित है। हाईकोर्ट ने याची के वेतन संबंधी दावे पर उसकी उपस्थिति का सत्यापन करते हुए नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए थे। आदेश के अनुपालन में डीआईओएस कार्यालय ने 14 जुलाई 2026 को याची और संस्था प्रबंधक को सुनवाई के लिए बुलाते हुए नियुक्ति से जुड़े जरूरी अभिलेख मांगे थे। निर्धारित तिथि पर दोनों के उपस्थित न होने पर दोबारा नोटिस जारी किया गया, लेकिन इसके बाद भी सुनवाई में कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद विद्यालय की उपस्थिति पंजिका की वर्ष 2016-17 से जुलाई 2026 तक जांच की गई। इसमें हर्षित गुप्ता का नाम और हस्ताक्षर नहीं मिला। प्रधानाचार्य ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि नियुक्ति से संबंधित कोई पत्रावली विद्यालय में उपलब्ध नहीं है। उनके अनुसार हर्षित गुप्ता ने न कार्यभार ग्रहण किया और न ही किसी कार्यदिवस में विद्यालय में उपस्थित होकर उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर किए। जांच में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल सामने आए। डीआईओएस की समीक्षा में 2009 की विनियमावली और 2018 के संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा गया कि नियुक्ति संबंधी अधिकार चयन बोर्ड को दिए गए थे और डीआईओएस को ऐसी नियुक्ति के अनुमोदन का अधिकार नहीं रहा था। उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा के बाद डीआईओएस ने 30 सितंबर 2022 के तत्कालीन डीआईओएस के आदेश को पुनर्विचार योग्य माना और हर्षित गुप्ता को वेतन भुगतान की अनुमन्यता देने संबंधी आदेश को तत्काल प्रभाव से री-कॉल करते हुए हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में प्रकरण का निस्तारण कर दिया।









