प्रेमी के लिए सोते हुए पति पर डाल दिया था तेजाब

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महिला को मिली ऐसी सजा की जीवन भर नहीं मिलेगा सुकून
संभल। उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में पति पर तेजाब फेंककर उसे जीवनभर के लिए अंधा बनाने वाली महिला को जिला एवं सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी महिला पर 1.75 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। सजा सुनाए जाने के बाद महिला को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। मामला सदर कोतवाली क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार बिजनौर जिले के नगीना निवासी कहकशां ने वर्ष 2019 में मुजफ्फर अली से प्रेम विवाह किया था। दोनों के दो बच्चे हैं। विवाह के कुछ समय बाद कहकशां के पड़ोस के एक युवक से प्रेम संबंध हो गए थे, जिसका मुजफ्फर अली विरोध करता था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक 7 मार्च 2025 की सुबह मुजफ्फर अली ने अपनी पत्नी को उसके प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि उसी रात जब मुजफ्फर अपने कमरे में सो रहा था, तब कहकशां बाजार से तेजाब खरीदकर लाई और उसके चेहरे व शरीर पर फेंक दिया। तेजाब से उसका चेहरा, दोनों आंखें, कंधे और पेट गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद गंभीर रूप से घायल मुजफ्फर को पहले जिला अस्पताल और बाद में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब छह महीने तक उसका इलाज चला। चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उसकी दोनों आंखों की रोशनी वापस नहीं आ सकी। विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र कुमार यादव ने अदालत को बताया कि तेजाब हमले से एक दिन पहले आरोपी महिला ने पति को भोजन में जहर देकर मारने की भी कोशिश की थी। अभियोजन के अनुसार इस साजिश में उसके परिजनों की भी भूमिका थी, हालांकि इस संबंध में अलग से कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान सत्र न्यायालय ने पहले आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, हालांकि बाद में उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। 27 मई 2026 को अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहकशां को दोषी ठहराया और उसकी जमानत निरस्त कर दी थी। सोमवार को सजा सुनाते हुए अदालत ने उसे आजीवन कारावास और 1.75 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। सजा सुनते ही दोषी महिला अदालत में रोने लगी, जिसके बाद महिला पुलिसकर्मियों ने उसे अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। वहीं पीड़ित मुजफ्फर अली भी अपनी मां के साथ अदालत पहुंचा था। उसने तेजाब हमले से पड़े गंभीर घावों के कारण अपना चेहरा तौलिए से ढंक रखा था। दोषी महिला की अधिवक्ता पिंकी शर्मा ने अदालत के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि प्राथमिकी दर्ज होने में 17 दिन की देरी हुई थी तथा कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि इस निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। अदालत के इस फैसले को तेजाब हमलों के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। इस घटना ने न केवल एक व्यक्ति की दृष्टि छीन ली, बल्कि दो मासूम बच्चों के भविष्य को भी प्रभावित किया है। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड सुनाया है।

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