कक्षाओं की दीवारों से टूट रहीं ईंटे, लिपिक के कार्यालय में एसी, सोफा और लक्जरी बेड मिलने से उठे सवाल
आजमगढ़। जनपद के ऐतिहासिक शिक्षण संस्थानों में शामिल वेस्ली इंटर कॉलेज की बदहाली ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 1837 में स्थापित इस विद्यालय में एक समय प्रवेश पाना विद्यार्थियों के लिए उपलब्धि माना जाता था, लेकिन वर्तमान स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। विद्यालय के रजिस्टर में महज 84 विद्यार्थियों के नामांकन, जर्जर कक्षाओं, छत से ईंटों के टुकड़े गिरने की आशंका और कर्मचारियों के वेतन पर कथित तौर पर प्रतिमाह करीब 22 लाख रुपये खर्च होने के बीच विद्यालय परिसर में बने एक लिपिक के सुसज्जित कार्यालय ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। मीडिया टीम शुक्रवार को सुबह करीब 11:30 बजे विद्यालय पहुंची तो परिसर में सन्नाटा पसरा मिला। दो कमरों में लगभग दो दर्जन विद्यार्थी परीक्षा देते नजर आए। प्रभारी प्रधानाचार्य अजीत कुमार पोर्टर अपने कक्ष में मौजूद थे। विद्यालय के कई कमरों की हालत खराब मिली। छतों की स्थिति ऐसी बताई गई कि बारिश के दौरान पानी टपकने के साथ ही ईंटों के टुकड़े गिरने का खतरा बना रहता है। स्टाफ रूम की स्थिति भी संतोषजनक नहीं दिखाई दी। विद्यालय की बदहाली के बीच परिसर के अंदर स्थित लिपिक योगेन्द्र प्रताप सिंह के कार्यालय की साज-सज्जा चर्चा का विषय बनी हुई है। निरीक्षण के दौरान कमरे में एयर कंडीशनर, सोफा, आकर्षक कुर्सियां, डाइनिंग टेबल और लक्जरी बेड सहित कई सुविधाएं दिखाई दीं। कमरे में अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं भी मौजूद थीं। एक तरफ प्रधानाचार्य और शिक्षकों को जर्जर भवन में बैठकर काम करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर विद्यालय परिसर में इस तरह सुसज्जित कार्यालय मिलने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विद्यालय के संसाधनों और भवन के रखरखाव को लेकर प्राथमिकताएं क्या हैं? हालांकि, कमरे में मौजूद सुविधाओं के खर्च का स्रोत और उनके उपयोग की वास्तविक स्थिति जांच का विषय है। विद्यालय में आठ लेक्चरर, पांच सहायक अध्यापक, 13 चपरासी और लिपिक समेत कर्मचारियों की व्यवस्था होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम बताई जा रही है। जूनियर स्तर की तीन कक्षाओं में मात्र एक विद्यार्थी के नामांकन की बात भी सामने आई है। ऐसे में शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन पर होने वाले खर्च, विद्यार्थियों की संख्या तथा विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता महसूस हो रही है। विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य अजीत कुमार पोर्टर ने बताया कि प्रबंधकीय विवाद के कारण विद्यालय की मरम्मत नहीं हो पा रही है। कमरों की स्थिति खराब होने और छत से ईंटों के टुकड़े गिरने की आशंका के चलते विद्यालय की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि भवन की दशा देखकर अभिभावक और विद्यार्थी भी यहां आने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। लिपिक के कार्यालय में बनी विशेष व्यवस्था के संबंध में उन्होंने कुछ कहने में असमर्थता जताई। वहीं, लिपिक योगेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने कार्यालय की साज-सज्जा के बारे में कहा कि उन्होंने इसे अपने शौक के लिए सजाया है और वह शौकीन व्यक्ति हैं। उनके इस बयान के बाद कार्यालय में उपलब्ध सुविधाओं और उनके औचित्य को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक अजय कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि विद्यालय के किसी कार्यालय को निजी उपयोग के लिए वीआईपी शयनकक्ष के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, तो इसकी जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यालय का इस्तेमाल शयनकक्ष या निजी शौक पूरे करने के लिए करना गलत है। विद्यालय की अन्य कमियों पर भी संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल यह है कि करीब 189 वर्ष पुराने इस शिक्षण संस्थान की बदहाली दूर करने के लिए जिम्मेदार स्तर पर कब ठोस कदम उठाए जाएंगे। विद्यालय की छतों की मरम्मत, विद्यार्थियों की घटती संख्या, कर्मचारियों की तैनाती और वेतन पर होने वाले खर्च के साथ-साथ लिपिक के कार्यालय में उपलब्ध सुविधाओं की निष्पक्ष जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। शिक्षा के मंदिर की गरिमा और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है।

