आजमगढ़ : विद्यालय में सोने वाले गुरुजी के खिलाफ नोटिस जारी

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प्रबंधक एवं प्रधानाध्यापक भी आए चपेट में, 2 दिन के भीतर देना होगा जवाब

आजमगढ़। कुरैश जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक के सोते मिलने और मिड-डे-मील के बर्तनों पर धूल जमी होने से संबंधित खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। खंड शिक्षा अधिकारी, नगर क्षेत्र, आजमगढ़ ने विद्यालय के प्रबंधक एवं प्रधानाध्यापक को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय से 16 अक्टूबर 2026 को जारी में मध्यान्ह भोजन योजना (पीएम पोषण) के क्रियान्वयन और विद्यालय में अनुशासन व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। नोटिस में 16 अक्टूबर को समाचार पत्र में प्रकाशित खबर का हवाला दिया गया है, जिसमें शिक्षक के सोते मिलने और मिड-डे-मील के बर्तनों पर धूल जमी होने का उल्लेख किया गया था। नोटिस के अनुसार, विद्यालय के संचालन का निर्धारित समय सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक है। इसके बावजूद उपस्थिति पंजिका में कर्मचारियों द्वारा सुबह आठ बजे ही हस्ताक्षर किए जाने को अनुशासनहीनता बताया गया है। विभाग ने इसे सरकारी सेवक आचरण नियमावली-1956 के प्रतिकूल आचरण के रूप में भी उल्लेखित किया है। नोटिस में कहा गया है कि सुबह करीब 11 बजे समाचार पत्र की टीम के विद्यालय भ्रमण के दौरान सहायक अध्यापक संजय कुमार यादव प्रधानाध्यापक कक्ष में सोते हुए पाए गए। वहीं, सहायक अध्यापिका रजनी राय और लिपिक तमन्ना फिरोज के रसोइया से बातचीत करते हुए मिलने का उल्लेख भी किया गया है। मिड-डे-मील के बर्तनों पर धूल जमी होने के मामले में प्रभारी प्रधानाध्यापक मोहम्मद फैयाज खां के बयान का भी जिक्र किया गया है। उनके अनुसार, बच्चों को भोजन कराने के बाद रसोइयों ने बर्तन धो दिए थे। हालांकि, नोटिस में प्रधानाध्यापक कक्ष में रखे बर्तनों पर धूल जमा होने को लेकर योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए गए हैं। खंड शिक्षा अधिकारी ने नोटिस में कहा है कि विद्यालय में कथित अनियमितताओं से संबंधित खबरों के कारण शासन और विभाग की छवि प्रभावित हो रही है। प्रबंधक एवं प्रधानाध्यापक से दो दिन के भीतर युक्तियुक्त स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब नहीं मिलने पर यह मानते हुए कि संबंधित पक्ष को कुछ नहीं कहना है, नियमानुसार विधिक कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को आख्या भेजी जाएगी।

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