आज़मगढ़ : विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने वाला गिरफ्तार

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इंटरनेट से डाउनलोड टेम्पलेट में एडिटिंग कर तैयार करता था फर्जी परमिट

पुराने संपर्कों के जरिए बेरोजगार युवाओं को बनाता था शिकार
आजमगढ़। जनपद की साइबर सेल एवं सिधारी थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले एक शातिर अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से दो फर्जी मालदीव वर्क परमिट, एक मोबाइल फोन, आधार कार्ड, 200 रुपये नकद तथा घटना में प्रयुक्त प्लेटिना मोटरसाइकिल बरामद की गई है। मोटरसाइकिल को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज कर दिया गया है। पुलिस के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान "साइबर ठगी के जड़ में वार" के तहत साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक रवि प्रकाश गौतम के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। प्रतिबिंब पोर्टल पर प्राप्त संदिग्ध बैंक खातों एवं एटीएम हॉटस्पॉट की जांच के दौरान मुखबिर की सूचना पर यादव ढाबा के पास घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान मुकेश यादव (29 वर्ष) पुत्र चंद्र भूषण यादव, निवासी हैदराबाद (छतवारा), थाना सिधारी, जनपद आजमगढ़ के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह इंटरनेट से मालदीव का मूल वर्क परमिट डाउनलोड कर मोबाइल में सुरक्षित रखता था और उसमें एडिटिंग कर विभिन्न लोगों के नाम से फर्जी वर्क परमिट तैयार करता था। इसके बाद वह व्हाट्सएप अथवा प्रिंट कॉपी के माध्यम से दस्तावेज भेजकर लोगों से धनराशि वसूलता था। पुलिस को उसके मोबाइल से मालदीव के आर्थिक विकास मंत्रालय का वर्क परमिट टेम्पलेट भी मिला है, जिसका उपयोग वह फर्जी दस्तावेज तैयार करने में करता था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले मुंबई में मर्चेंट नेवी से जुड़े कार्य में था। वहीं बने पुराने संपर्कों का लाभ उठाकर वह विभिन्न राज्यों के रोजगार की तलाश कर रहे श्रमिकों और युवाओं को विदेश भेजने का झांसा देता था। आकर्षक वेतन और नौकरी का लालच देकर वह उनसे किस्तों में रुपये ऐंठता था। पुलिस जांच में यह भी पता चला कि आरोपी ने अपनी भाभी के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर यूनियन बैंक में खाता खुलवाया था। समन्वय पोर्टल पर जांच के दौरान इस खाते के विरुद्ध पश्चिम बंगाल के एक शिकायतकर्ता की साइबर ठगी की शिकायत मिली। शिकायतकर्ता से विदेश भेजने के नाम पर 35 हजार रुपये तय किए गए थे, जिनमें से 21 हजार रुपये लेकर आरोपी ने फर्जी वर्क परमिट उपलब्ध कराया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी के अन्य पीड़ितों, बैंक खातों, सहयोगियों और पूरे नेटवर्क की विस्तृत जांच की जा रही है। उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66C के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।

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