आजमगढ़ : ऐतिहासिक शीतला धाम के मार्ग पर जलभराव से श्रद्धालु परेशान, मरम्मत की उठी मांग

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कीचड़ और पानी से होकर मंदिर पहुंचने को मजबूर श्रद्धालु, प्रशासन से शीघ्र सड़क दुरुस्त कराने की अपील
रिपोर्ट-अबुल कैश
निजामाबाद-आजमगढ़। ऐतिहासिक शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध मां शीतला धाम जाने वाले मार्ग पर जलभराव और कीचड़ के कारण श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में मंदिर तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह से कीचड़युक्त हो गया है, जिससे दर्शन-पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से शीघ्र मार्ग की मरम्मत कराने की मांग की है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शीतला को स्वास्थ्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। चेचक, खसरा जैसी महामारियों से राहत की कामना को लेकर श्रद्धालु माता के दरबार में धार और फूल अर्पित करते हैं। मान्यता है कि माता की कृपा से रोगों से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि व आरोग्यता बनी रहती है। मरीज के स्वस्थ होने पर परिवारजन हलुआ-पूड़ी का भोग लगाकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शीतला धाम में वासंतिक और शारदीय नवरात्र के अलावा पूरे वर्ष श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है। प्रतिदिन सुबह और शाम पूजा-अर्चना तथा कीर्तन होता है। दूर-दराज और अन्य राज्यों में रहने वाले क्षेत्र के लोग भी परिवार के मांगलिक कार्यों के बाद वर्ष में एक बार माता के दर्शन के लिए अवश्य पहुंचते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में माता गौरा के आत्मदाह के बाद भगवान शिव जब उनका शरीर लेकर जा रहे थे, तब उनके रक्त की कुछ बूंदें निजामाबाद की इस धरती पर गिरी थीं। तभी से यह स्थान मां शीतला के शक्तिपीठ के रूप में विख्यात माना जाता है और पूर्वांचल के प्रमुख देवी मंदिरों में इसकी विशेष पहचान है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इतने प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तक पहुंचने के लिए उन्हें पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए मंदिर मार्ग की शीघ्र मरम्मत कराई जाए, ताकि दर्शन के लिए आने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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