यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छ: माह बढ़ा

Youth India Times
By -
0




पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद होने के संकेत

26 मई को समाप्त हो रहा था ग्राम पंचायतों का कार्यकाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने के चलते प्रदेश सरकार ने सभी ग्राम प्रधानों का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। पंचायती राज विभाग ने सोमवार देर शाम इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। प्रदेश की 57 हजार 694 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा था। सरकार के इस फैसले के बाद वर्तमान ग्राम प्रधान चुनाव होने तक अपने पद पर बने रहेंगे। ग्राम प्रधान संगठनों ने भी मांग की थी कि नए चुनाव होने तक मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी दी जाए। बताया जा रहा है कि यह पहला अवसर होगा जब प्रदेश में प्रशासनिक समिति बनाए जाने की व्यवस्था लागू होगी। सूत्रों के अनुसार, अब पंचायत चुनाव अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाने की संभावना है। प्रदेश में जनवरी-फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, जिसके चलते पंचायत चुनाव की प्रक्रिया फिलहाल टलती नजर आ रही है। इधर, पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण तय करने के लिए प्रदेश सरकार ने राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन भी कर दिया है। पंचायतीराज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राम औतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। आयोग में सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह को सदस्य नियुक्त किया गया है। अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से छह माह के लिए की गई है। यह आयोग पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण से जुड़े आंकड़ों का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने 18 मई 2026 को आयोग गठन की अधिसूचना जारी की थी। आयोग के गठन के साथ ही पंचायत चुनाव में आरक्षण तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)