आजमगढ़ में अनुमन्यता पत्र में हेराफेरी का मामला, जेडी की तहरीर पर कार्यालय सहायक के खिलाफ मुकदमे की संस्तुति

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अभिलेखों में नाम जोड़ने का आरोप, पहले भी इसी विद्यालय प्रकरण में दर्ज हो चुका है मुकदमा

आजमगढ़। श्री देवानन्द संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दानशनिचरा रामगढ़ के अनुमन्यता विषयक पत्र में कथित हेराफेरी का मामला प्रकाश में आया है। इस प्रकरण में नवल किशोर, संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) आजमगढ़ की तहरीर पर जेडी कार्यालय में तैनात सहायक विधिचंद यादव के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराने के लिए पत्र भेजा गया है। जेडी द्वारा लिखे गए पत्र के अनुसार विद्यालय की अनुमन्यता संबंधी पत्रावली का 28 फरवरी 2026 को अवलोकन किया गया, जिसमें पाया गया कि 18 अक्टूबर 2024 के पत्र से संबंधित अभिलेखों में हेराफेरी की गई है। पत्रावली में संलग्न पत्र पर विधिवत मार्किंग नहीं की गई थी। इस संबंध में प्रबंधक के हस्ताक्षरयुक्त मूल पत्र सामने आया, जिसे उसी पत्रांक व दिनांक पर कार्यालय सहायक विजय कुमार यादव द्वारा रिसीव किया गया था। पत्र के अनुसार कार्यालय सहायक ने स्पष्ट किया कि रिसीव पत्र पर तत्कालीन अधिकारी से हस्ताक्षर कराने के बाद रिसीव नंबर अंकित कर संबंधित सहायक विधिचंद यादव को सौंप दिया गया था। जबकि पत्रावली में बिना मार्किंग के संलग्न पत्र में मूल चार नामों के अतिरिक्त रिंकी यादव का नाम प्रधानाचार्य के रूप में जोड़ा गया पाया गया। जेडी के अनुसार इस मामले में विधिचंद यादव द्वारा पत्रावली में रिंकी यादव का नाम जोड़ते हुए कुल पांच नाम दर्शाए गए। बताया गया कि 19 अगस्त 2025 को जब पटल प्रभारी के रूप में रामबचन यादव की नियुक्ति हुई, तब विधिचंद यादव द्वारा पांच नामों वाला पत्र उन्हें रिसीव कराया गया, जिसके आधार पर 29 नवंबर 2025 को आख्या प्रेषित की गई। मामले में पूछताछ के दौरान पहले विधिचंद यादव ने मौखिक रूप से पांच नाम वाले पत्र से इनकार किया, किंतु बाद में लिखित स्पष्टीकरण में उसे सही बताया। वहीं डाक सहायक ने मूल पत्र चार नामों वाला ही होना बताया है। जेडी के अनुसार प्रबंधक के हस्ताक्षर का इस प्रकार उपयोग किया जाना प्रथम दृष्टया आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है, जिसके संबंध में शहर कोतवाल को मुकदमा दर्ज करने हेतु पत्र प्रेषित किया गया है। इस संबंध में शहर कोतवाल ने बताया कि मुकदमा दर्ज करने हेतु पत्र प्राप्त हुआ है, लेकिन उसे उच्च अधिकारियों के माध्यम से अग्रसारित करने के लिए कहा गया है। वहीं जेडी नवल किशोर ने पुष्टि की कि प्रकरण में शहर कोतवाली को पत्र भेजा गया है और आगे की कार्रवाई पुलिस द्वारा की जाएगी। गौरतलब है कि इसी विद्यालय से जुड़े एक पूर्व मामले में तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक वीरेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा भी विधिचंद यादव पर गुमराह कर हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया गया था, जिसमें शहर कोतवाली में विधिचंद यादव समेत छह लोगों के विरुद्ध पहले से ही मुकदमा दर्ज है।

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