आज़मगढ़ : आरटीआई सूचना न देने पर बीएसए कार्यालय के जनसूचना अधिकारी पर गिरी गाज, 25 हजार का जुर्माना

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तीन समान मासिक किस्तों में होगी अर्थदंड की वसूली, पूरी धनराशि कटने तक वेतन आहरण पर रोक लगाने का आदेश

आजमगढ़। सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं कराना जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय के जनसूचना अधिकारी को भारी पड़ गया। उत्तर प्रदेश सूचना आयोग ने पूर्व में लगाए गए 25 हजार रुपये के अर्थदंड की वसूली तीन समान मासिक किस्तों में कराने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, आयोग ने कोषाधिकारी को आदेश दिया है कि अर्थदंड की पूरी धनराशि वेतन से कटौती होने तक संबंधित अधिकारी का वेतन आहरित न किया जाए।
राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र सिंह ने संजय कुमार सिंह की शिकायत पर सुनवाई करते हुए यह सख्त आदेश जारी किया। शिकायतकर्ता ने 22 नवंबर 2025 को बीएसए कार्यालय के जनसूचना अधिकारी के समक्ष आरटीआई आवेदन प्रस्तुत कर आठ अक्टूबर 2024 को कार्यालय में जमा किए गए अपने पत्र, शासनादेश और अन्य संबंधित अभिलेखों की जानकारी मांगी थी। निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराए जाने पर उन्होंने सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया।
इस मामले में आयोग ने 31 जुलाई 2025 को तत्कालीन जनसूचना अधिकारी राजीव पाठक को सूचना देने में अनावश्यक देरी और आयोग के आदेशों का अनुपालन नहीं करने का दोषी माना था। इसके बाद सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत 250 रुपये प्रतिदिन की दर से अधिकतम 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया था। साथ ही अधिकारी से सूचना उपलब्ध कराने में हुई देरी और आयोग के आदेशों की अवहेलना को लेकर स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।
मामले की 15 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में शिकायतकर्ता संजय कुमार सिंह उपस्थित रहे, जबकि संबंधित जनसूचना अधिकारी की ओर से कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। आयोग के मुताबिक, अधिकारी को ई-मेल और पंजीकृत डाक के माध्यम से नोटिस भेजा गया था। पंजीकृत नोटिस 29 सितंबर 2026 को तामील होने के बावजूद न तो मांगी गई सूचना उपलब्ध कराई गई और न ही अर्थदंड के संबंध में कोई जवाब या स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया।
अधिकारी की लगातार अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने रजिस्ट्रार को तीन समान मासिक किस्तों में 25 हजार रुपये की वसूली सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। इसके लिए आदेश की प्रति कोषाधिकारी/वरिष्ठ कोषाधिकारी को भेजने तथा पूरी धनराशि की कटौती होने तक वेतन आहरण पर रोक लगाने को कहा गया है। वहीं, बीएसए ने मामले में बताया कि संजय कुमार सिंह की नियुक्ति वर्ष 1997 में हुई थी। अनियमितता पाए जाने पर उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। अब वह यह जानकारी मांग रहे हैं कि उनकी नियुक्ति दोबारा किस आधार पर हो सकती है। बीएसए के अनुसार, मामले की जांच कर रिपोर्ट देने वाली कमेटी के दो कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ऐसे में दोबारा कमेटी गठित करनी होगी। इसके बाद ही मामले में आगे कोई विचार किया जा सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यालय की ओर से सूचना उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण ही आयोग ने अर्थदंड की कार्रवाई की है।

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