आजमगढ़ : भाई की हत्या से शुरू हुई थी खून की कहानी

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सात साल बाद फिर चार जिंदगियां हुईं खत्म, आरोपी ने मुठभेड़ में गंवाई जान
शंभूपुर सनसनीखेज हत्याकांड से जुड़ी पुरानी कड़ी आई सामने
आजमगढ़। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार रात हुए सनसनीखेज हत्याकांड की कड़ियां वर्ष 2019 से जुड़ती नजर आ रही हैं। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अरविंद सिंह के परिवार में पहले भी हत्या की वारदात हो चुकी थी। अरविंद के चचेरे भाई मनीष सिंह पर उसके सगे भाई सुनील सिंह की हत्या का आरोप लगा था। इस मामले में मनीष और उसका भाई अवनीश जेल भेजे गए थे। परिजनों के अनुसार, दोनों करीब डेढ़ माह पहले ही जेल से बाहर आए थे। मृतक सुनील सिंह की पत्नी बबीता के भाई सूरज सिंह ने बताया कि बबीता और मनीष सिंह के बीच कथित प्रेम संबंध थे। इसकी जानकारी सुनील सिंह को हो गई थी। सूरज के मुताबिक, सुनील महाराष्ट्र में रहते थे और वहां बालासाहेब ठाकरे के जनसंपर्क अधिकारी के तौर पर काम करते थे। उन्होंने मनीष के खिलाफ चोरी, छिनैती और छेड़खानी समेत करीब 20 मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सूरज के मुताबिक, एक मामले में अदालत ने मनीष सिंह और उसके भाई अवनीश को 20 साल की सजा सुनाई थी। वर्ष 2019 में दोनों जमानत पर बाहर आए थे। इसके बाद सुनील सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या के मामले में दोनों को फिर जेल भेज दिया गया। परिजनों के अनुसार, करीब डेढ़ माह पहले जेल से लौटने के बाद परिवार में तनाव बना हुआ था। बताया गया कि अरविंद की पत्नी बबीता और उसकी मां ने पुजारियों से संपर्क किया था। पुजारियों ने कथित तौर पर उन्हें बताया कि सुनील सिंह की आत्मा परिवार को परेशान कर रही है। इसके बाद पूजा-पाठ कराने के लिए पुजारियों को बुलाया गया। सोमवार से घर में पूजा चल रही थी। परिजनों के मुताबिक, अरविंद ने पुजारियों को अगले दिन पूजा के लिए नहीं आने की चेतावनी दी थी। मंगलवार को जब उसने घर में पूजा होते देखा तो वह नाराज हो गया। आरोप है कि उसने पत्नी बबीता से विवाद करते हुए कहा कि उसके कारण उसके भाई की हत्या हुई और अब पूजा के नाम पर ड्रामा किया जा रहा है। इसके बाद उसने पिस्टल से फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग में अरविंद की पत्नी बबीता और पूजा कराने आए दो पुजारियों की मौत हो गई। घटना के बाद अरविंद की मां और भतीजी घर से बाहर निकल आए, जबकि एक पुजारी भी किसी तरह बचकर निकल गया। इसके बाद अरविंद अपनी 10 वर्षीय बेटी, 11 माह की बेटी और सात वर्षीय बेटे के साथ घर के कमरे में बंद हो गया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा खुलवाने के साथ ही अरविंद को समझाने का प्रयास शुरू किया। करीब सात घंटे तक पुलिस ने उसे बातचीत के जरिए बाहर आने के लिए मनाया। परिवार के लोगों को भी मौके पर बुलाकर उससे अपील कराई गई, लेकिन वह बाहर आने को तैयार नहीं हुआ। इसी दौरान उसने अपने सात वर्षीय बेटे को भी गोली मार दी, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। घटनास्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस लगातार लोगों को घटनास्थल से दूर करती रही। गांव में देर रात तक तनाव और भय का माहौल बना रहा। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, सूचना मिली थी कि शंभूपुर गांव में एक व्यक्ति ने तीन लोगों को गोली मार दी है। पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंचा। आरोपी ने खुद को बच्चों के साथ एक कमरे में बंद कर लिया था। करीब सात घंटे तक उसे समझाने का प्रयास किया गया। इस दौरान उसने अपने बेटे को गोली मार दी। एसएसपी के मुताबिक, पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश करने का प्रयास किया तो आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें अरविंद घायल हो गया। पुलिस उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। हत्याकांड की पृष्ठभूमि में वर्ष 2019 में हुई सुनील सिंह की हत्या और उसके बाद परिवार में चले विवाद को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। साभार (au)

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