आजमगढ़ : स्थायी मिर्च मंडी की मांग को झटका, मानक पूरे न होने से निर्माण पर रोक

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विधान परिषद में सरकार का जवाब— वार्षिक आय और लाइसेंसी व्यापारियों के निर्धारित मानक पूरे नहीं होने से उपमंडी निर्माण संभव नहीं
रिपोर्ट-आरपी सिंह
फूलपुर (आजमगढ़)। पिछले करीब पांच दशकों से स्थायी मिर्च मंडी की मांग कर रहे फूलपुर क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों को फिलहाल निराशा हाथ लगी है। कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग ने विधान परिषद में स्पष्ट किया है कि निर्धारित मानकों की पूर्ति न होने के कारण फूलपुर में स्थायी उपमंडी स्थल का निर्माण फिलहाल संभव नहीं है। विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक एवं कुंवर महाराज सिंह द्वारा नियम-110 के तहत उठाए गए प्रश्न के जवाब में विभाग ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में बताया गया कि फूलपुर क्षेत्र में लाल भरुआ मिर्च का व्यापार पिछले लगभग 50 वर्षों से होता आ रहा है। यहां उत्पादित मिर्च उत्तर प्रदेश के अलावा झारखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल तक भेजी जाती है। इसके बावजूद स्थायी मंडी के अभाव में किसानों और व्यापारियों को हर वर्ष अस्थायी स्थानों पर कारोबार करना पड़ता है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, फूलपुर को उपमंडी स्थल घोषित किया जा चुका है, लेकिन वर्तमान में यहां केवल चार लाइसेंसी व्यापारी ही कार्यरत हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में मिर्च व्यापार से मात्र 45,210 रुपये का मंडी शुल्क प्राप्त हुआ। सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि किसी उपमंडी के निर्माण के लिए कम से कम एक करोड़ रुपये की वार्षिक आय तथा 75 लाइसेंसी थोक व्यापारी एवं आढ़तियों का संचालन होना अनिवार्य है। फूलपुर में इन मानकों की पूर्ति नहीं होने के कारण स्थायी उपमंडी निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत नहीं किया जा सकता। वहीं, क्षेत्र के किसान और व्यापारी लंबे समय से स्थायी मिर्च मंडी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मंडी बनने से मिर्च व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और परिवहन सहित अन्य सुविधाएं भी सुलभ होंगी। विभाग के जवाब के बाद क्षेत्र के किसानों और व्यापारियों में निराशा का माहौल है।

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