'हिन्दी सूफी काव्य में हिन्दू संस्कृति' विषय पर विद्वानों ने रखे विचार, साहित्यिक विरासत को सहेजने पर दिया जोर
आजमगढ़। हिन्दुस्तानी एकेडेमी, प्रयागराज एवं डीएवी पीजी कॉलेज, आजमगढ़ के हिन्दी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में प्रख्यात साहित्यकार स्व. डॉ. कन्हैया सिंह की जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय "हिन्दी सूफी काव्य में हिन्दू संस्कृति" रहा, जिसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों एवं साहित्यकारों ने भाग लिया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने की। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार एवं उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त को 'डॉ. कन्हैया सिंह साहित्य सम्मान-2026' से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के कुलपति प्रो. एन.के. शुक्ला, माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह तथा जी.बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। स्वागत वक्तव्य डॉ. पंकज सिंह ने दिया, जबकि कार्यक्रम की प्रस्तावना हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य अवनीश राय ने प्रस्तुत की। सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रो. सदानंद प्रसाद गुप्त ने कहा कि डॉ. कन्हैया सिंह ने हिन्दी सूफी काव्य परंपरा के अध्ययन को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रेमाख्यानक काव्य परंपरा पूरी तरह भारतीय संस्कृति पर आधारित है और सूफी कवियों ने भारतीय जीवन मूल्यों तथा समन्वय की भावना को अपने साहित्य में प्रमुखता से स्थान दिया। प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह ने डॉ. कन्हैया सिंह के मार्गदर्शन को याद करते हुए उन्हें शोधपरक दृष्टि का प्रेरक बताया। वहीं प्रो. एन.के. शुक्ला ने पाठानुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान की चर्चा की। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि पाठानुसंधान जैसे विषय को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डॉ. कन्हैया सिंह जैसी विभूतियों ने आजमगढ़ की साहित्यिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित किया है। द्वितीय तकनीकी सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों ने विषय पर शोधपरक व्याख्यान प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन प्रो. गीता सिंह एवं अवनीश राय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विनम्र सेन सिंह ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।

