भ्रष्टाचार निवारण संगठन की ओर से लेखपालों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई पर जताई नाराजगी
रिपोर्ट : हर्ष चन्देल
आजमगढ़। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के आह्वान पर शनिवार को फूलपुर तहसील के लेखपालों ने थाना दिवस का बहिष्कार कर तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। लेखपालों ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एसीओ) की ओर से लेखपालों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए इसे अनुचित बताया। प्रदर्शन के दौरान लेखपालों ने नारेबाजी कर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। जिला उपाध्यक्ष यशपाल चौहान, तहसील अध्यक्ष विशाल सिंह चंदेल और तहसील मंत्री बिंद्रेश यादव के नेतृत्व में लेखपाल तहसील परिसर में एकत्र हुए। धरने को संबोधित करते हुए संघ मंत्री बिंद्रेश यादव ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण संगठन उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से लेखपालों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश और असुरक्षा की भावना बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लेखपाल ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न परिस्थितियों के बीच शासन की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने के साथ ही राजस्व संबंधी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी के विरुद्ध बिना पर्याप्त आधार के कार्रवाई होती है तो इससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा के साथ ही उसके पारिवारिक जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। संघ भ्रष्टाचार के खिलाफ निष्पक्ष और कानून सम्मत कार्रवाई के पक्ष में है, लेकिन नियमों की अनदेखी कर किसी कर्मचारी के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी। लेखपालों ने अयोध्या जिले की सोहावल तहसील में लेखपाल उत्कर्ष दीप से जुड़े प्रकरण का भी मुद्दा उठाया। संघ पदाधिकारियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के आधार पर प्रथम दृष्टया रिश्वत मांगने का कोई स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आता है। लेखपालों ने प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने, दोषमुक्त पाए जाने पर कार्रवाई समाप्त करने तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारी या अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की मांग की। धरना-प्रदर्शन समाप्त होने के बाद लेखपालों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी फूलपुर को सौंपा। इस दौरान नागेंद्र तिवारी, प्रदीप सोनी, नीरज यादव, रविशंकर यादव, कृष्णचंद यादव, रविकांत, ज्ञानेंद्र, शौरभ राय समेत बड़ी संख्या में लेखपाल मौजूद रहे।







