आजमगढ़ : बहन की राखी के लिए आधी रात को 43 किमी दौड़ा भाई, सुबह पहुंचकर बंधवाई राखी

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एसएसबी में कोच पहलवान दीपक सिंह ने रक्षाबंधन पर पेश किया समर्पण का अनोखा उदाहरण
छोटी बहन से राखी बंधवाने के बाद बड़ी बहन के घर तक जारी रखी दौड़, भावुक हुआ परिवार
आजमगढ़। रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। इस रिश्ते की गहराई का अनोखा उदाहरण मुबारकपुर थाना क्षेत्र के मोहब्बतपुर गांव में देखने को मिला। गांव निवासी पहलवान दीपक सिंह ने अपनी बहनों से राखी बंधवाने के लिए रात के समय करीब 43 किलोमीटर की दौड़ पूरी की। दिल्ली में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में कोच के पद पर तैनात दीपक सिंह की इस पहल की क्षेत्र में खूब चर्चा हो रही है। रक्षाबंधन के लिए छुट्टी लेकर घर आए दीपक सिंह ने बहनों के साथ पर्व मनाने का निर्णय लिया। इसी क्रम में रात करीब एक बजे उन्होंने दौड़ शुरू की। दौड़ते हुए वह कप्तानगंज थाना क्षेत्र के पासीपुर गांव स्थित अपनी छोटी बहन अन्नू सिंह के घर पहुंचे। करीब 3:45 बजे वहां पहुंचने पर अन्नू सिंह ने भाई की कलाई पर राखी बांधी। बहन से राखी बंधवाने के बाद दीपक सिंह ने कुछ समय वहां बिताया और फिर अपनी दूसरी बहन के घर जाने के लिए दोबारा दौड़ शुरू कर दी। इसके बाद दीपक सिंह अतरौलिया थाना क्षेत्र के बांसगांव स्थित अपनी बड़ी बहन नीलम सिंह के घर की ओर निकल पड़े। रातभर दौड़ते हुए उन्होंने करीब 43 किलोमीटर का सफर पूरा किया और शुक्रवार सुबह लगभग 5:30 बजे बहन के घर पहुंच गए। सुबह-सुबह भाई को दौड़कर अपने घर पहुंचा देखकर नीलम सिंह भावुक हो गईं। उन्होंने भाई की कलाई पर राखी बांधी और आत्मीयता के साथ उसका स्वागत किया। इस भावुक पल के दौरान परिवार के सदस्यों के अलावा आसपास के ग्रामीण भी मौजूद रहे। दीपक सिंह के इस जज्बे को देखकर लोगों ने भाई-बहन के रिश्ते के प्रति उनके प्रेम और समर्पण की सराहना की। ग्रामीणों का कहना था कि आमतौर पर लोग रक्षाबंधन पर बहन के घर वाहन से पहुंचते हैं, लेकिन दीपक सिंह ने दौड़ को माध्यम बनाकर इस पर्व को यादगार बना दिया। इस अनोखी दौड़ में दीपक सिंह के साथ उनके सहयोगी पहलवान अश्वनी सिंह, राजन यादव, दुर्गेश यादव, विवेक यादव, आदर्श सिंह, चंदन सिंह, राघवेंद्र सिंह और सलमान गौतम सहित अन्य साथी भी शामिल रहे। साथियों ने पूरी यात्रा के दौरान उनका उत्साह बढ़ाया और उनका साथ दिया। रक्षाबंधन के अवसर पर दीपक सिंह का यह प्रयास क्षेत्र में भाई-बहन के प्रेम, समर्पण और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया। उनकी पहल की चर्चा आसपास के गांवों में भी होती रही।

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