71.55 हेक्टेयर प्रतिबंधित भूमि के कथित अवैध आवंटन में 19 पर मुकदमा, जांच रिपोर्ट के बाद पुलिस और शासन की सख्त कार्रवाई
सम्भल। जिले के जुनावई थाना क्षेत्र स्थित गैर आबाद ग्राम सुखैला की प्रतिबंधित सरकारी भूमि के कथित फर्जी पट्टा आवंटन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन एसडीएम, पूर्व ग्राम प्रधान, सेवानिवृत्त राजस्व एवं चकबंदी अधिकारियों समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में कुल 19 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। कार्रवाई जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट और वर्तमान लेखपाल स्वाती शर्मा की तहरीर के आधार पर की गई। पुलिस के अनुसार, ग्राम सुखैला की झाऊ एवं रेत श्रेणी की लगभग 71.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि का नियमों के विपरीत फर्जी तरीके से पट्टा आवंटित किया गया। आरोप है कि राजस्व और चकबंदी अधिकारियों ने कूटरचित अभिलेख तैयार कर अपात्र लोगों के नाम सरकारी भूमि आवंटित कर दी। बताया गया कि इसी भूमि को लेकर वर्ष 2018 में भी 58 कथित अपात्र लाभार्थियों और नौ अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। उस समय फर्जी प्रविष्टियां निरस्त कर दी गई थीं, लेकिन इसके बावजूद वर्ष 2019 में फिर से 162 लोगों के पक्ष में पट्टे स्वीकृत कर दिए गए। जांच में सामने आया कि पूरी प्रक्रिया राजस्व संहिता के प्रावधानों की अनदेखी कर संपन्न की गई और भूमि आवंटन में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय और वैधानिक कार्रवाई की संस्तुति की थी। इसके बाद शुक्रवार को भौना नंगला हल्का क्षेत्र की लेखपाल स्वाती शर्मा ने थाना जुनावई में तहरीर देकर तत्कालीन एसडीएम, तहसील एवं चकबंदी अधिकारियों, राजस्व कर्मचारियों, ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सदस्यों सहित 19 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने की मांग की। तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी और छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने वर्तमान में तैनात संबंधित लेखपाल अमित कुमार को निलंबित कर दिया है। वहीं शासन ने वर्तमान में हाथरस में तैनात मनवीर तथा हरदोई में तैनात भीमराव सिंह, जो उस समय चकबंदी अधिकारी थे, को भी निलंबित कर दिया है। उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण के मुख्य आरोपियों में शामिल तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह को पहले ही रिश्वतखोरी के एक अन्य मामले में सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले शासन द्वारा बर्खास्त किया जा चुका है।





