अंगवस्त्र भेंट कर बढ़ाया सम्मान, बोले “माता-पिता को अकेला छोड़ना हमारी संस्कृति नहीं”
आजमगढ़। समाज में जहां रिश्तों की गर्माहट धीरे-धीरे कम होती दिखाई दे रही है, वहीं कुछ लोग आज भी मानवता और संवेदनशीलता की ऐसी मिसाल पेश कर रहे हैं, जो दिल को छू जाती है। ऐसा ही भावुक और प्रेरणादायक दृश्य आजमगढ़ जिले के फरिहा स्थित वृद्धाश्रम में देखने को मिला, जब समाजसेवी एवं उद्यमी इंजीनियर सुनील कुमार यादव बुज़ुर्गों के बीच पहुंचे और उनके साथ समय बिताकर अपनत्व का एहसास कराया। वृद्धाश्रम पहुंचते ही इंजीनियर सुनील कुमार यादव ने वहां रह रहे बुज़ुर्गों का हालचाल जाना और आत्मीयता से बातचीत की। लंबे समय से अपनेपन की कमी महसूस कर रहे कई वृद्धजन उनसे मिलकर भावुक हो उठे। उन्होंने बुज़ुर्गों के दुख-दर्द सुने और उन्हें परिवार जैसा स्नेह दिया। इस दौरान सबसे भावुक पल तब देखने को मिला जब इंजीनियर सुनील कुमार यादव ने अपने हाथों से बुज़ुर्गों को भोजन कराया और स्वयं भी उनके साथ बैठकर भोजन किया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद भावुक कर देने वाला था। उनकी सादगी और अपनत्व ने यह साबित कर दिया कि सेवा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि व्यवहार से दिखाई देती है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने वृद्धजनों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया और भरोसा दिलाया कि समाज में आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो उन्हें अपना परिवार मानते हैं। उनके इस मानवीय व्यवहार से कई बुज़ुर्गों की आंखें नम हो गईं। मीडिया से बातचीत में इंजीनियर सुनील कुमार यादव ने कहा कि माता-पिता की सेवा करना हर संतान का पहला धर्म और कर्तव्य है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि लगातार बढ़ते वृद्धाश्रम समाज में नैतिक मूल्यों के कमजोर होने का संकेत हैं। उन्होंने कहा, “जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को जन्म दिया, उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया और अपने सपनों का त्याग कर उन्हें काबिल बनाया, आज वही माता-पिता अपने ही बच्चों से दूर होकर वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हैं। यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।” उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि बुज़ुर्गों का सम्मान करें और उन्हें कभी अकेला महसूस न होने दें। माता-पिता और बुज़ुर्ग ही हमारे संस्कार, संस्कृति और समाज की सबसे बड़ी पहचान हैं। इंजीनियर सुनील कुमार यादव का यह मानवीय कदम अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और समाज के लिए एक प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।






