बसपा ने चुनाव के पहले चला बड़ा सियासी दांव

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बढ़ा इस क्षेत्र का सियासी पारा, भाजपा को भी किया बड़ा संकेत
लखनऊ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने एक बार फिर सियासी हलचल तेज कर दी है। बसपा सुप्रीमो Mayawati की ओर से उठाए गए इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पश्चिमी यूपी, जिसे बसपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, वहां हाल के वर्षों में Bharatiya Janata Party (भाजपा) के बढ़ते प्रभाव और Samajwadi Party (सपा) की सक्रियता ने सियासी समीकरण बदल दिए हैं। इसी के मद्देनजर बसपा ने एक बार फिर इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति तेज कर दी है। रविवार को Noida में सपा अध्यक्ष Akhilesh Yadav की रैली के जरिए पश्चिमी यूपी में पकड़ मजबूत करने की कोशिश का बसपा ने राजनीतिक जवाब दिया। बसपा की ओर से यह भी दावा किया गया कि क्षेत्र का वास्तविक और व्यापक विकास उसकी सरकार के दौरान ही हुआ, जिसमें नोएडा में बने स्मारक, पार्क और एक्सप्रेसवे अहम उदाहरण हैं। पिछले दो दशकों के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो पश्चिमी यूपी में बसपा का प्रभाव लंबे समय तक बना रहा, लेकिन वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की मजबूत एंट्री ने बसपा को बड़ा नुकसान पहुंचाया। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के चलते पार्टी को कुछ सीटों पर सफलता मिली थी, लेकिन गठबंधन टूटने के बाद स्थिति फिर कमजोर हो गई। अब बसपा एक बार फिर पश्चिमी यूपी में अपना जनाधार मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में बसपा सुप्रीमो मायावती मंगलवार को प्रदेश के सभी पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक करेंगी। इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति के साथ संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में जिला स्तर तक के पदाधिकारियों को बुलाया गया है, जहां उनसे पूर्व में दिए गए कार्यों की रिपोर्ट ली जाएगी और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

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