15 लाख रुपये के लेनदेन विवाद में दिया हत्या की घटना को दिया था अंजाम
आजमगढ़। जनपद में चर्चित राजेश चन्द्र पाठक हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए एक संगठित आपराधिक गिरोह को चिन्हित किया है। थाना कोतवाली पुलिस द्वारा तैयार गैंगचार्ट को जिलाधिकारी की स्वीकृति मिलने के बाद अब गैंग लीडर समेत पांच आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रभारी निरीक्षक कोतवाली यादवेन्द्र पाण्डेय के अनुसार, यह गिरोह जनपद स्तर पर सक्रिय है और आर्थिक व भौतिक लाभ के उद्देश्य से संगठित अपराधों को अंजाम देता रहा है। जांच में सामने आया कि मृतक राजेश चन्द्र पाठक से मुख्य आरोपी रविन्द्र सिंह उर्फ संतोष सिंह उर्फ साधू सिंह ने करीब 15 लाख रुपये उधार लिए थे, जिसे उसने अपने साथी हरिकेश चौहान को दिलवा दिया था। इसी पैसों के विवाद में साजिश रचकर 17 फरवरी 2025 को राजेश चन्द्र पाठक की हत्या कर दी गई और शव को जीयनपुर क्षेत्र में फेंक दिया गया। इस मामले में पहले गुमशुदगी दर्ज की गई थी, लेकिन 19 फरवरी 2025 को मिले अज्ञात शव की पहचान मृतक की पत्नी चांदनी पाठक द्वारा किए जाने के बाद हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना के दौरान सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे गिरोह का खुलासा हुआ। पुलिस जांच में कुल पांच आरोपी हरिकेश चौहान (गैंग लीडर), रविन्द्र सिंह उर्फ संतोष सिंह, भोला सिंह, विजय सिंह उर्फ बन्टी और मोहम्मद फैसल की संलिप्तता पाई गई। एक अन्य आरोपी चन्द्रभूषण सिंह उर्फ चन्दू ने घटना के बाद आत्महत्या कर ली थी, जबकि एक नामजद आरोपी बृजराज यादव उर्फ बिजली की संलिप्तता गलत पाई गई। मामले में पुलिस ने पूर्व में आरोपपत्र न्यायालय में प्रेषित कर दिया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है। अब गैंग की गतिविधियों को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की संयुक्त बैठक में गैंगचार्ट को मंजूरी दी गई है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के आतंक के कारण कोई भी व्यक्ति इनके खिलाफ गवाही देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। ऐसे में गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 के तहत कड़ी कार्रवाई कर गैंग की आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने की तैयारी की गई है।






