एक ही परिवार में तीन मौतों से मचा कोहराम
बलिया। उभांव थाना क्षेत्र के पशुहारी गांव में बेटी की शादी की तैयारियों में जुटे एक परिवार की खुशियां महज तीन दिन में मातम में बदल गईं। शनिवार को पत्नी आशा देवी (46) की मौत के बाद मंगलवार को बुजुर्ग मां जोनिहा (76) ने भी दम तोड़ दिया। परिवार के लोग मां का अंतिम संस्कार कर घर लौटे ही थे कि वाराणसी के ट्रामा सेंटर से बेटी प्रीति (23) की मौत की खबर आ गई। एक के बाद एक तीन मौतों से शिवचंद राजभर का परिवार पूरी तरह टूट गया। घटना के बाद गांव में शोक की लहर है। पशुहारी गांव निवासी शिवचंद राजभर अपनी पत्नी आशा देवी, मां जोनिहा, बेटे मनन और बेटी प्रीति के साथ रहते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण शिवचंद कई वर्षों से कर्नाटक में रहकर वेल्डिंग का काम करते थे। करीब एक माह पहले वह अपने बेटे मनन के साथ गांव लौटे थे। घर आने के बाद उन्होंने बेटी प्रीति की शादी तय की थी। इसके बाद परिवार में शादी की तैयारियां शुरू हो गई थीं और खरीदारी भी चल रही थी। परिजनों के मुताबिक आशा देवी काफी समय से बीमार थीं। उन्हें दिमागी बीमारी और पाइल्स की शिकायत थी। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी और उन्हें सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण स्थानीय स्तर पर ही उनका इलाज कराया जा रहा था। शनिवार को उनकी मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद परिवार में मातम छा गया। परिवार अभी आशा देवी की मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि मंगलवार को शिवचंद की बुजुर्ग मां जोनिहा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सांस लेने में परेशानी के बाद कुछ ही देर में उनकी भी मौत हो गई। एक ही परिवार में लगातार दूसरी मौत से घर में कोहराम मच गया। इधर, शिवचंद की बेटी प्रीति की तबीयत भी लगातार खराब चल रही थी। परिजनों के अनुसार उसे सर्दी-जुकाम, बुखार, कमर दर्द और खून की कमी की शिकायत थी। उसकी प्लेटलेट्स भी काफी कम हो गई थीं। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे वाराणसी स्थित ट्रामा सेंटर ले गए, जहां उसका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान परिवार ने कई यूनिट रक्त की व्यवस्था भी की, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। मंगलवार को परिवार के लोग जोनिहा का अंतिम संस्कार करने के बाद घर लौटे ही थे कि वाराणसी से प्रीति की मौत की खबर आ गई। कुछ घंटे पहले जिस घर में बुजुर्ग मां की अंतिम विदाई का गम था, उसी घर में बेटी की मौत की खबर ने परिवार को पूरी तरह झकझोर दिया। प्रीति की मौत की सूचना गांव में पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण शिवचंद के घर पहुंचने लगे। शिवचंद कई वर्षों से कर्नाटक में वेल्डिंग का काम कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। बेटे मनन की पढ़ाई में रुचि कम होने पर करीब एक वर्ष पहले वह उसे भी अपने साथ कर्नाटक ले गए थे, जहां मनन दोपहिया वाहनों की मरम्मत का काम सीख रहा था। करीब एक माह पहले दोनों गांव लौटे थे। गांव लौटने के बाद प्रीति की शादी तय हुई तो परिवार में खुशियां लौट आई थीं। शादी के लिए खरीदारी शुरू हो गई थी। शिवचंद भी परिवार के साथ रहकर बेटी की शादी की जिम्मेदारी पूरी करना चाहते थे। लेकिन तीन दिन के भीतर पत्नी, मां और बेटी की मौत ने उनकी पूरी दुनिया उजाड़ दी। परिजनों के अनुसार प्रीति को बुखार के साथ सांस संबंधी परेशानी थी। उसकी दादी जोनिहा को भी सांस लेने में दिक्कत थी। वहीं प्रीति का भाई मनन भी सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित है। हालत खराब होने के कारण वह अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सका। एक ही परिवार में तीन दिनों के भीतर तीन मौतों की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। एसडीएम के निर्देश पर चिकित्सकों की टीम शिवचंद के घर पहुंची और परिवार के सदस्यों की स्वास्थ्य स्थिति के साथ ही तीनों मौतों से जुड़े कारणों की जानकारी ली। अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार सिंह के अनुसार प्राथमिक जांच में पत्नी आशा देवी और बेटी प्रीति की मौत खून की कमी के चलते होने की बात सामने आई है, जबकि बुजुर्ग जोनिहा की मौत सांस लेने में तकलीफ के कारण हुई। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों की टीम यह भी जांच कर रही है कि परिवार में डेंगू या किसी अन्य बीमारी का संक्रमण तो नहीं था। एक ही परिवार में तीन दिन के भीतर तीन मौतों की घटना से पशुहारी गांव में हर कोई स्तब्ध है। जिस घर में जल्द ही शादी के गीत गूंजने वाले थे, वहां अब मातम और सन्नाटा पसरा है। ग्रामीण पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं। घटना ने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है।




