संविधान के अनुसूचित जाति आदेश-1950 के पैरा-3 में संशोधन कर धर्म आधारित प्रतिबंध खत्म करने की उठाई आवाज
आजमगढ़। पीस पार्टी के जिलाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद आसिफ खान के नेतृत्व में सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के पैरा-3 में संशोधन कर धर्म आधारित प्रतिबंध समाप्त करने और दलित मुस्लिम समुदाय को अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने की मांग की गई। पीस पार्टी के जिलाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद आसिफ खान ने कहा कि सामाजिक न्याय और संविधान में निहित समानता के सिद्धांत के तहत दलित मुस्लिम समुदाय को भी अनुसूचित जाति का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा धर्म के आधार पर सीमित किया गया, जबकि बाद में समान सामाजिक पृष्ठभूमि वाले सिख और बौद्ध समुदायों को इसके दायरे में शामिल किया गया। जिला कोषाध्यक्ष सुफियान अहमद ने कहा कि वर्ष 2006 की सच्चर समिति और वर्ष 2007 के न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र आयोग ने मुस्लिम समाज के सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति पर चिंता जताई थी। उन्होंने बताया कि दोनों स्तरों पर दलित मुसलमानों और दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने की अनुशंसा की गई थी, लेकिन इस दिशा में अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी है। जिला महासचिव मनोज राव ने कहा कि धर्म के आधार पर किसी वंचित समुदाय को संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखना सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि पात्र दलित मुस्लिम समुदाय को अनुसूचित जाति का दर्जा देकर उन्हें संविधान प्रदत्त अधिकार एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। ज्ञापन सौंपने के दौरान शम्सीर अंसारी, शादिक अमीन, रमेश राजभर, मजहर संजरी, गुलाब हैदर रब्बानी, सेराज जमाली, सराज अनवर, वशैफ, मो. मुकर्रम, फैजुर्रहमान, मो. गुलसैफ, मो. जमाल और नैमुर्रहमान सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।




