लखनऊ/बलिया। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता एवं बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक उमाशंकर सिंह का दिल्ली में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश विधानसभा, बलिया जनपद और राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। उमाशंकर सिंह वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के इकलौते विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे थे और बाद में उन्हें बसपा विधायक दल का नेता भी बनाया गया था। उमाशंकर सिंह ने पहली बार वर्ष 2012 में सामान्य घोषित हुई रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी के रूप में शानदार जीत दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने 2017 और 2022 में भी लगातार जीत हासिल कर क्षेत्र में अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ कायम रखी। एक समय दो लाभ के पद के मामले में उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हुई थी, लेकिन बाद में उनकी सदस्यता बहाल हो गई थी। राजनीति के साथ-साथ समाजसेवा के क्षेत्र में भी उमाशंकर सिंह की अलग पहचान थी। उन्होंने पहले 251 और बाद में 351 जरूरतमंद जोड़ों का सामूहिक विवाह कराकर पूरे प्रदेश में चर्चा बटोरी। शिक्षा, सामाजिक सहायता और जनकल्याण के कार्यों के कारण उन्हें क्षेत्र में एक जनप्रिय नेता के रूप में जाना जाता था। उनके निधन पर राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उमाशंकर सिंह का निधन सामाजिक और राजनीतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह का निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं। उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के रसड़ा क्षेत्र के खनवर गांव में हुआ था। उनके पिता घुराहु सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी थे। अपने सरल स्वभाव, संगठन के प्रति निष्ठा और जनसेवा के कारण उमाशंकर सिंह ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अलग पहचान बनाई। उनके निधन से बसपा ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक जगत ने एक सक्रिय जननेता को खो दिया।



