आजमगढ़ : निबलेट की डायरी से समझा 1942 का आजमगढ़, भारत छोड़ो आंदोलन पर हुआ मंथन

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शिब्ली नेशनल कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय जन-प्रतिरोध और तत्कालीन परिस्थितियों पर हुई चर्चा
आजमगढ़। शिब्ली नेशनल कॉलेज के इतिहास विभाग के तत्वावधान में 'भारत छोड़ो आंदोलन 1942 और आजमगढ़ : निबलेट की डायरी के संदर्भ में' विषय पर शैक्षिक एवं ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान आजमगढ़ में हुई घटनाओं, जन-प्रतिरोध तथा तत्कालीन राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों का निबलेट की डायरी के संदर्भ में विश्लेषण किया गया। विशेष वक्ता केसरी नारायण सिंह ने कहा कि भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष का निर्णायक चरण था, जिसमें आजमगढ़ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने निबलेट की डायरी को उस दौर की स्थानीय घटनाओं को समझने का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत बताया। इसके माध्यम से तत्कालीन प्रशासनिक प्रतिक्रिया, जनभावनाओं और आंदोलन की तीव्रता का अनुमान लगाया जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर अफसर अली ने की। इतिहास विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अलाउद्दीन खान ने कहा कि इतिहास केवल बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय स्तर पर जनता की भागीदारी, भावनाओं और संघर्षों का अध्ययन भी इतिहास लेखन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि निबलेट की डायरी जैसे समकालीन स्रोत आजमगढ़ की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका को नए दृष्टिकोण से समझने में उपयोगी हैं। उन्होंने नई पीढ़ी को स्थानीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में अपने क्षेत्र के योगदान से परिचित कराने पर जोर दिया। इस अवसर पर आशीष एवं श्नंद कुमार ने भी विचार व्यक्त करते हुए वर्ष 1942 के आंदोलन के विभिन्न पहलुओं, विशेषकर आजमगढ़ की स्थानीय परिस्थितियों और जन-प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहम्मद शकीम ने किया। उन्होंने विषय के विभिन्न पक्षों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करते हुए वक्ताओं और प्रतिभागियों के बीच संवाद स्थापित किया। अंत में डॉ. सिद्धार्थ सिंह ने अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में इतिहास विभाग के शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ अन्य विभागों के शिक्षक एवं विद्यार्थी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का वातावरण ज्ञानवर्धक और शोधपरक रहा। प्रतिभागियों ने स्थानीय इतिहास के महत्वपूर्ण प्रसंगों को समकालीन ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर समझने के प्रयास की सराहना की।

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