आजमगढ़ : हादसे में डीएवी कॉलेज के शिक्षक की हुई मौत

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तीर्थयात्रा से लौटते समय ट्रेलर की चपेट में आए, परिजनों ने एम्बुलेंस और राहत व्यवस्था पर उठाए सवाल
आजमगढ़। शहर के कटरा मोहल्ला निवासी एवं डीएवी पीजी कॉलेज के वाणिज्य विभाग में अंशकालिक शिक्षक शौनक साहू की सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। उनकी असामयिक मौत से शिक्षा जगत, छात्र-छात्राओं तथा शहरवासियों में शोक की लहर दौड़ गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार शौनक साहू अपने मित्रों और परिजनों सहित कुल 64 लोगों के साथ 27 मई को एक निजी बस से तीर्थयात्रा पर निकले थे। विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन के बाद सभी लोग वापस आजमगढ़ लौट रहे थे। सोमवार की रात पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हैदरगढ़ के पास उनकी बस का टायर पंचर हो गया। बस को पार्किंग लेन में खड़ा कर चालक और परिचालक टायर बदलने का कार्य कर रहे थे। बताया जाता है कि रात करीब 11 बजे चालक जैक निकालने के लिए बस के पीछे गया। उसी दौरान शौनक साहू भी वहां पहुंचे। तभी बीच वाली लेन से आ रहा एक तेज रफ्तार ट्रेलर अनियंत्रित होकर पार्किंग लेन में घुस गया और चालक तथा शौनक साहू को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना तत्काल एक्सप्रेसवे आपातकालीन सेवा, डायल-112 और एम्बुलेंस को दी गई। मौके पर पुलिस और एक्सप्रेसवे कर्मचारी पहुंच गए, लेकिन परिजनों के अनुसार एम्बुलेंस लगभग आधे घंटे बाद पहुंची। घायलों को पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए केजीएमयू, लखनऊ रेफर कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सकों के आश्वासन पर उन्हें सरकारी एम्बुलेंस से केजीएमयू भेजा गया, लेकिन एम्बुलेंस की गति धीमी होने के कारण लगभग 60 किलोमीटर की दूरी तय करने में करीब डेढ़ घंटा लग गया। रास्ते भर शौनक दर्द से कराहते रहे और रात करीब एक बजे केजीएमयू के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही उन्होंने अंतिम सांस ले ली। परिजनों ने आरोप लगाया कि यदि एम्बुलेंस समय पर पहुंचती और घायलों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाया जाता तो संभवत: उनकी जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने राहत एवं बचाव व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। शौनक साहू अपने परिवार में दो भाइयों और दो बहनों में दूसरे स्थान पर थे। अपने पीछे वह माता-पिता, पत्नी, दो बच्चों, भाई-बहनों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। विनम्र स्वभाव और हंसमुख व्यक्तित्व के धनी शौनक साहू छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय थे। वह न केवल एक समर्पित शिक्षक थे, बल्कि एक जिम्मेदार पुत्र, भाई, पति और पिता के रूप में भी जाने जाते थे। उनकी मृत्यु की खबर मिलते ही शिक्षकों, छात्रों और शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। पोस्टमार्टम के बाद उनका शव सोमवार शाम उनके आवास पहुंचा, जहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। देर शाम शहर से सटे तमसा नदी के राजघाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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