आजमगढ़ : अभिलेखों में हेराफेरी का बड़ा खुलासा, संयुक्त शिक्षा निदेशक ने दर्ज कराई FIR

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मूल पत्र गायब कर फर्जी पत्र लगाने का आरोप, तत्कालीन पटल प्रभारी पर कार्रवाई की मांग

आजमगढ़। जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें अभिलेखों में कथित हेराफेरी कर मूल पत्र को गायब करने और उसकी जगह फर्जी पत्र लगाने का आरोप लगा है। इस संबंध में संयुक्त शिक्षा निदेशक, आजमगढ़ मंडल नवल किशोर ने थाना कोतवाली सदर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री देवानन्द संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय, दानशनिचरा रामगढ़, आजमगढ़ की अनुमन्यता से संबंधित पत्र दिनांक 08 अक्टूबर 2024 के अभिलेखों के परीक्षण के दौरान गड़बड़ी उजागर हुई। जांच में पाया गया कि पत्रावली में संलग्न पत्र पर पांच व्यक्तियों के नाम अंकित हैं, जबकि मूल रूप से प्राप्त पत्र में केवल चार नाम ही दर्ज थे। डाक सहायक विजय कुमार यादव के अनुसार, उन्होंने जो मूल पत्र प्राप्त किया था, उसमें चार नाम थे और उसी को संबंधित पटल सहायक को सौंपा गया था। वहीं, पत्रावली में संलग्न पांच नामों वाला पत्र संदिग्ध पाया गया, जिस पर न तो उचित मार्किंग है और न ही डाक सहायक के हस्ताक्षर। जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन पटल प्रभारी विधिचन्द यादव द्वारा मूल पत्र को हटाकर उसी पत्रांक और तिथि पर नया पत्र तैयार कर अभिलेखों में संलग्न किया गया। इस फर्जी पत्र में एक अतिरिक्त नाम जोड़ा गया, जिससे अनुचित लाभ देने की आशंका जताई गई है। पूछताछ के दौरान विधिचन्द यादव के बयान भी विरोधाभासी पाए गए। पहले उन्होंने चार नाम वाले पत्र को सही बताया, जबकि बाद में लिखित उत्तर में पांच नाम वाले पत्र को सही बताया। इससे मामले में संदेह और गहरा गया। संयुक्त शिक्षा निदेशक ने इसे गंभीर आपराधिक कृत्य मानते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच कराने का अनुरोध किया है। साथ ही कहा गया है कि इस प्रकार की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई आवश्यक है, ताकि भविष्य में अभिलेखों से छेड़छाड़ की घटनाएं रोकी जा सकें। फिलहाल, पुलिस ने मामले में विधिचन्द यादव तत्कालीन पटल प्रभारी वर्तमान प्रधान सहायक कार्यालय संयुक्त शिक्षा निदेशक, आजमगढ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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