आजमगढ़ : बाबा भवरनाथ मंदिर प्रकरण में बड़ा फैसला, सेवा समिति का पंजीकरण निरस्त

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दान पेटिका विवाद और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बाद प्रशासन की सख्त कार्रवाई
आजमगढ़। जनपद के देवखरी स्थित बाबा भवरनाथ मंदिर, जो आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ पिछले कुछ समय से विवादों में घिरा रहा है, अब एक बड़े प्रशासनिक फैसले के चलते चर्चा में है। सहायक रजिस्ट्रार फर्म, सोसाइटीज एंड चिट्स की ओर से मंदिर पर काबिज बाबा भवरनाथ मंदिर सेवा समिति का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई लंबे समय से चल रही शिकायतों और जांच के बाद की गई है। इससे पहले जिलाधिकारी द्वारा पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया था, जिसने मंदिर से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को जांच के दायरे में लिया। मामला तब तूल पकड़ गया था जब कुछ महीने पहले मंदिर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस वीडियो में आधी रात को दान पेटिका खोली जा रही थी और उसमें से नकदी निकाली जा रही थी। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भारी विरोध हुआ और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आए कि मंदिर में श्रद्धालुओं और व्यापारियों द्वारा दिए गए दान का सही उपयोग नहीं किया गया। आरोप है कि मंदिर परिसर में बने कई भवनों और दुकानों पर समिति ने कब्जा कर लिया और उन्हें किराए पर देकर मोटी रकम वसूली, लेकिन इन आय-व्यय का कोई आधिकारिक लेखा-जोखा नहीं रखा गया। स्थानीय निवासी तहसीलदार सिंह ने बताया कि उनके पूर्वज पहले मंदिर की देखरेख करते थे, लेकिन वर्ष 2013 में कथित रूप से अनियमित तरीकों से नई समिति ने मंदिर का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद मंदिर की व्यवस्था में लगातार गड़बड़ियां सामने आने लगीं। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति ने आर्थिक अनियमितताएं कीं और दान की राशि का दुरुपयोग किया। तहसीलदार सिंह के अनुसार, जब पहले ग्राम प्रधान के नेतृत्व में समिति कार्यरत थी, उस समय का लगभग तीन लाख रुपये आज भी बैंक खाते में सुरक्षित है। इसके बाद के वर्षों में न तो आय-व्यय का कोई स्पष्ट हिसाब रखा गया और न ही पारदर्शिता बरती गई। प्रशासन के इस फैसले को मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब आगे मंदिर के संचालन और नई व्यवस्था को लेकर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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