आजमगढ़ : पुलिस लाइन में अंधाधुंध चली पिचकरिया, फटी सैकड़ो चो...ली...या

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रंगाई दु रुपिया से लेकर नागिन डांस का रही झूम, श्रीमती का जलवा रहा कायम
फिर कहता हूं कि बुरा न मानो होली है
आजमगढ़। जनपद में छिटपुट घटनाओं के बीच होली का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से निपट गया, लेकिन असली रंग तो होली के अगले दिन पुलिस लाइन में देखने को मिला। परंपरा के मुताबिक पुलिस महकमे ने अपनी होली एक दिन बाद मनाई और जब मनाई तो ऐसी कि देखने वाले भी मुस्कुरा उठे। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार की अगुवाई में पुलिस लाइन ग्राउंड रंगों से सराबोर हो गया। डीआईजी सुनील कुमार सिंह की मौजूदगी में सैकड़ों पुलिसकर्मी फव्वारों के बीच ऐसे झूमे कि मानो वर्दी की सारी सख्ती रंगों में घुल गई हो। ढोल-नगाड़ों की थाप और “चोली रंगाई देहब दु रुपिया” और नागिन डांस की धुन पर माहौल ऐसा बना कि कई पुलिसवालों की ‘चो…ली’ (यानी कमीज़ सिर्फ आज के लिए चोली) तक कुर्बान हो गई और वे उसी अंदाज में ठुमके लगाते रहे। इधर मीडिया सेल की ओर से पत्रकारों को बाकायदा न्योता भी दिया गया था। सीओ सिटी शुभम तोदी ने तो पुरजोर अपील भी की कि पत्रकार बंधु जरूर पधारें। मगर लगता है पत्रकार बिरादरी पहले ही माहौल भांप चुकी थी—शायद उन्हें अपनी ‘चोली’ की चिंता ज्यादा थी। इसलिए ज्यादातर ने दूर से ही होली की शुभकामनाएं देना बेहतर समझा। हां, कुछ साहसी पत्रकार मौके का जायजा लेने पहुंचे भी, लेकिन हालात देख समझदारी से किनारा कर लिया। कार्यक्रम में कई दिलचस्प दृश्य भी सामने आए। डीआईजी सुनील कुमार सिंह के स्वागत में नगाड़े गूंजे तो वहीं सीओ सिटी का नृत्य ऐसा रहा कि लोग उनकी ‘कमरिया’ की लचक देखते ही रह गए। उधर डॉक्टर साहब यानी एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने भी मंच पर ठुमके लगाते हुए मुस्कराकर कह दिया—“मेरे बारे में तो लोग जानते ही हैं…”। होली की इस रंगीन महफिल में एक बात फिर रहस्य ही बनी रही कि एसपी सिटी वाला प्रकरण आखिर सुलझा या नहीं, इसका जवाब किसी के पास नहीं था। इस बीच शहर कोतवाल का रंगीला सैल्यूट भी खूब चर्चा में रहा। वहीं एक पूर्व कोतवाल, जो इन दिनों मुबारकपुर थाने की शोभा बढ़ा रहे हैं, उनकी चाल-ढाल देख लोग चुटकी लेने से खुद को रोक नहीं पाए। कुछ दिन पहले मीडिया सेल की गलती से उन्हें “श्रीमती” की उपाधि दे दी गई थी और आज उनकी अदाएं देख कई लोग मुस्कुराकर यही कह बैठे “इस उम्र में भी श्रीमती का जलवा कायम है।” कुल मिलाकर पुलिस महकमे की होली रंग, ठुमकों, ठहाकों और सौहार्द के बीच संपन्न हो गई।
नोट: यह वर्णन पूरी तरह व्यंग्य और होली की मस्ती के भाव में प्रस्तुत है। आखिर होली है ही ऐसा त्योहार—रंग, उमंग और हल्की-फुल्की चुटकी के बिना मजा कहां। इसलिए इसे भी उसी अंदाज में लिया जाए… क्योंकि बुरा न मानो, होली है!

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