सरकार ने 400 करोड़ रुपये का बजट किया आवंटित
लखनऊ। प्रदेश में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। योजना के तहत वर्ष 2025-26 में स्नातक के अंतिम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। इसके अलावा निराश्रित और पात्र दिव्यांग छात्राओं को भी योजना का लाभ मिलेगा। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी राज्य और निजी विश्वविद्यालयों से पात्र छात्राओं का ब्योरा मांगा है। योजना के तहत उन छात्राओं को भी पात्र माना जाएगा, जिनके माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु हो चुकी हो और परिवार में भरण-पोषण करने वाला कोई अन्य सदस्य न हो। वहीं, मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी, स्ट्रोक, सेरेब्रल पाल्सी, हीमोफिलिया आदि से प्रभावित दिव्यांग छात्राओं को भी योजना में शामिल किया जाएगा। दिव्यांग छात्राओं के लिए दृष्टि और मानसिक स्थिति ठीक होना जरूरी होगा। कमर के ऊपर का हिस्सा स्वस्थ होने के कारण वे मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल चलाने में सक्षम हों तथा मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से उनकी दिव्यांगता 80 फीसदी या उससे अधिक प्रमाणित होनी चाहिए। ऐसी छात्राओं को दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की नियमावली के अनुसार स्कूटी उपलब्ध कराई जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव सर्वेश कुमार सिंह ने सभी राज्य और निजी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक तथा उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर वर्ष 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं की संख्या समेत अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने वर्ष 2025-26 में अंतिम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण छात्राओं का भी पूरा ब्योरा मांगा है। अभी तक करीब आधे राज्य और निजी विश्वविद्यालयों ने ही जानकारी उपलब्ध कराई है। हालिया ऑनलाइन बैठक में विभाग ने इस पर नाराजगी जताते हुए विश्वविद्यालयों को गूगल फॉर्म के माध्यम से जल्द सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए प्रदेश सरकार ने 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इसके तहत 50 हजार से अधिक छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी की खरीद जिला स्तर पर की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विभाग अतिरिक्त बजट भी उपलब्ध कराएगा। कैबिनेट से योजना की नियमावली मंजूर होने के बाद अब पात्र छात्राओं का डाटा जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।




