जिलाध्यक्ष के पत्नी व पुत्र को समिति में जगह मिलने पर सपा ने साधा निशाना, भाजपा ने बताया सामान्य प्रक्रिया
आजमगढ़। 2 अप्रैल की देर रात भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आजमगढ़ व लालगंज जिला कार्यसमिति की घोषणा की गई। लालगंज में इस बार कई नए चेहरों को शामिल किया गया है, वहीं कुछ पुराने पदाधिकारियों को भी समायोजित किया गया है। लालगंज जिला इकाई में हरीश तिवारी, अभिषेक सिंह बॉबी, नीरज तिवारी, सुनील सिंह डब्बू, मंतराम निषाद, शैलेन्द्र यादव और राजेश सरोज को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं सीता चौहान, ठाकुर प्रताप सिंह और आशुतोष उर्फ पंकज राय को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिलामंत्री पद पर संतोष कुमार पाण्डेय, रिया पाण्डेय, प्रमोद राजभर, राकेश चतुवेर्दी, अजीत कुमार गौतम, अनुराग सिंह सन्नी, रवीन्द्र प्रताप सिंह और शैलेष प्रजापति को स्थान दिया गया है। विनीत जायसवाल को जिला कोषाध्यक्ष तथा रजनीश जायसवाल को सह कोषाध्यक्ष बनाया गया है। मीडिया प्रभारी के रूप में धर्मेन्द्र कुमार सिंह तथा सह प्रभारी के रूप में रोशन लाल राजभर को जिम्मेदारी दी गई है। सोशल मीडिया का दायित्व आदर्श राय और अभिषेक तिवारी को सौंपा गया है। वहीं राजवीर सिंह को जिला आईटी संयोजक तथा सूरज सिंह और संदीप अस्थाना को सह संयोजक बनाया गया है। दुर्गा प्रसाद चौबे को जिला कार्यालय मंत्री नियुक्त किया गया है। हालांकि 61 सदस्यीय जिला कार्यसमिति में पूनम राजभर और निलेष राजभर के नामों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दोनों, लालगंज भाजपा जिलाध्यक्ष विनोद राजभर की पत्नी और पुत्र हैं, जिससे परिवारवाद के आरोप लगने लगे हैं। इस मामले में अशोक कुमार यादव, जो समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता हैं, ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि परिवारवाद का विरोध करने वाली पार्टी खुद इस पर अमल कर रही है। उन्होंने इसे भाजपा के ह्लकथनी और करनीह्व के अंतर का उदाहरण बताया। वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष विनोद राजभर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिला कार्यसमिति सदस्य का पद कोई महत्वपूर्ण पद नहीं है और इसमें परिवारवाद जैसी कोई बात नहीं है। हालांकि इस बयान के बाद भी स्थानीय स्तर पर चर्चा जारी है कि यदि यह पद महत्वपूर्ण नहीं है, तो फिर इसमें अपने परिवार के सदस्यों को शामिल करने की जरूरत क्यों पड़ी। इस पूरे मामले ने लालगंज भाजपा की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।





