अंधविश्वास का खौफनाक चेहरा, तंत्र-मंत्र के चक्कर में फंसे पिता ने नहीं किया अंतिम संस्कार
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के सदर बाजार थाना क्षेत्र के तेली मोहल्ला में अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र और शक के खतरनाक प्रभाव का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पिता ने अपनी बेटी की मौत के बाद भी उसका अंतिम संस्कार नहीं किया और करीब छह महीने तक शव को घर में ही सड़ने के लिए छोड़ दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब लंबे समय से बंद पड़े मकान का दरवाजा परिजनों ने खुलवाया। घर के अंदर का दृश्य बेहद भयावह था चारों ओर कूड़ा-करकट, सड़ा-गला सामान और तेज दुर्गंध फैली हुई थी। एक कमरे में युवती का कंकाल पड़ा मिला, जिसे देखकर सभी स्तब्ध रह गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने अवशेषों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और आरोपी पिता को हिरासत में ले लिया। पुलिस पूछताछ में आरोपी उदय भानू विश्वास, जो शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त बताया जा रहा है, ने स्वीकार किया कि उसकी बेटी प्रियंका नवंबर 2025 में ही मर चुकी थी। उसने बताया कि वह शव पर परफ्यूम छिड़ककर बदबू छिपाने की कोशिश करता रहा। इसके बाद वह मकान बंद कर हरिद्वार और देहरादून चला गया और परिजनों को बेटी के इलाज का झूठा बहाना देता रहा। जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2013 में पत्नी की आत्महत्या के बाद से ही आरोपी तंत्र-मंत्र और शक के प्रभाव में आ गया था। उसे संदेह था कि रिश्तेदारों ने तांत्रिक क्रिया के जरिए उसकी पत्नी को उससे छीन लिया। इसी कारण उसने रिश्तेदारों से दूरी बना ली और बेटी के साथ अलग-थलग जीवन जीने लगा। बताया गया कि जुलाई 2025 में बेटी की तबीयत बिगड़ने पर भी उसने चिकित्सा सहायता लेने के बजाय तांत्रिक क्रियाओं का सहारा लिया और किसी से मदद नहीं मांगी। बाद में वह हरिद्वार जाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के बारे में जानकारी भी जुटाता रहा, लेकिन घर लौटकर अंतिम संस्कार करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। फिलहाल युवती की मौत के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। यह बीमारी से हुई या किसी अन्य वजह से, इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगा। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।






