बेटे ने पिता की गोली मारकर हत्या की, शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाया

Youth India Times
By -
0




नीट की तैयारी को लेकर हुआ विवाद बना वारदात की वजह, आरोपी पुत्र गिरफ्तार

चार दिन तक बहन को कमरे में बंद रखा, आरी से काटकर अंग अलग-अलग जगह फेंके
लखनऊ। राजधानी के लखनऊ के आशियाना सेक्टर-एल में रहने वाले शराब कारोबारी व पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह (49) की उनके ही बेटे अक्षत प्रताप सिंह (21) ने गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने शव के टुकड़े कर दोनों हाथ और पैर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिए, जबकि सिर सहित धड़ घर के भीतर एक नीले ड्रम में छिपा दिया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जानकारी देते हुए डीसीपी मध्य विक्रांत वीर ने बताया कि 21 फरवरी को आशियाना थाने में मानवेंद्र सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने जांच के दौरान परिवार से पूछताछ की तो शक बेटे अक्षत पर गया। सख्ती से पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल कर ली। पुलिस के अनुसार, 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे पिता-पुत्र के बीच नीट परीक्षा की तैयारी को लेकर विवाद हुआ। मानवेंद्र सिंह बेटे पर परीक्षा की तैयारी का दबाव बना रहे थे। आरोपी के मुताबिक, बहस के दौरान पिता ने उस पर लाइसेंसी राइफल तान दी। राइफल छीनने की कोशिश में गोली चल गई, जिससे मानवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के समय घर के तीसरे तल पर छोटी बहन कृति अपने कमरे में सो रही थी। गोली की आवाज सुनकर वह कमरे में पहुंची तो पिता का शव पड़ा था। आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया और चार दिन तक घर में ही बंद रखे रखा। कृति सदमे में है और कुछ भी बोल पाने की स्थिति में नहीं है। हत्या के बाद अक्षत ने शव को घसीटकर भूतल पर लाया और खाली कमरे में रख दिया। उसने पहले कार से शव को गोमती नदी में फेंकने की योजना बनाई, लेकिन वजन अधिक होने के कारण सफल नहीं हो सका। इसके बाद वह बाजार से आरी खरीदकर लाया और शव के टुकड़े कर दिए। हाथ और पैर पारा क्षेत्र के सदरौना इलाके में फेंक दिए, जबकि धड़ को ठिकाने लगाने के लिए नीला ड्रम खरीदकर उसमें रख दिया। पुलिस ने ड्रम, आरी, कार और अन्य सामान बरामद कर लिए हैं। फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी के दादा सुरेंद्र पाल सिंह, जो सेवानिवृत्त दरोगा हैं और जालौन में रहते हैं, सूचना मिलते ही लखनऊ पहुंच गए। मेरठ के ब्रह्मपुरी में हुए चर्चित सौरभ हत्याकांड में भी नीले ड्रम का इस्तेमाल किया गया था। इसी तरह वर्ष 2015 में अमीनाबाद क्षेत्र में गौरी हत्याकांड में भी शव के टुकड़े कर अलग-अलग स्थानों पर फेंके गए थे। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)