रातों-रात बदली मुख्य द्वार की सूरत, प्राधिकरण के बयान से बढ़ा विवाद
आजमगढ़। आजमगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। डीएवी इंटर कॉलेज में प्रबंधकीय विवाद के बीच नए निर्माण की शिकायत पर 25 अक्टूबर 2025 को एडीए द्वारा की गई सीलिंग कार्रवाई अब विवाद का विषय बन गई है। करीब चार महीने तक विद्यालय का मुख्य गेट बंद रहा, लेकिन अब न तो गेट पर सील की पट्टी दिखाई दे रही है और न ही परिसर में कहीं एडीए की मौजूदगी के निशान स्पष्ट हैं। बताया जा रहा है कि सील लगने के बाद विद्यालय में पठन-पाठन और अन्य गतिविधियां दूसरे गेट से संचालित होती रहीं। उस समय की तस्वीरों में निर्माण क्षेत्र के साथ मुख्य गेट पर भी एडीए की सील पट्टी लगी दिखाई दे रही थी। हालांकि अब प्राधिकरण के अधिकारी कह रहे हैं कि गेट को सील किया ही नहीं गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गेट सील नहीं था तो वह चार महीने तक बंद क्यों रहा? और यदि बंद रहा तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है? वर्तमान स्थिति यह है कि मुख्य गेट की सूरत पूरी तरह बदल चुकी है। ऐसा प्रतीत होता है मानो वहां कभी कोई गेट या सील रही ही न हो। परिसर के अन्य हिस्सों में भी, जहां सीलिंग की कार्रवाई बताई गई थी, अब एडीए की पट्टियां नजर नहीं आ रही हैं। कुछ दीवारों पर आदेश की प्रतियां चस्पा जरूर दिखाई दे रही हैं, जो प्राधिकरण की कार्रवाई का संकेत देती हैं। इस पूरे मामले में एडीए के सचिव राहुल विश्वकर्मा ने स्पष्ट किया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा बोर्ड परीक्षा के मद्देनजर एक पत्र दिया गया था। जांच में यह सामने आया कि निर्माण क्षेत्र को सील किया गया था, न कि मुख्य गेट को। उन्होंने कहा कि यदि सील के बाद कोई नया निर्माण हुआ है तो उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले को लेकर शिकायतकर्ता, विद्यालय प्रबंधन और प्राधिकरण के बीच बयानबाजी जारी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि गेट सील नहीं था तो महीनों तक बंद रहने के पीछे वास्तविक कारण क्या था। मामले की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।




