आजमगढ़ में रिंग रोड का भूत राजनीति गलियारे में मचा रहा शोर

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मास्टर की चाबुक पर रिंग में रोड पर नाच रहा बंदर, जनता बजा रही ताली
असल में रिंग किसकी रोड किसका और नाच रहा....किसका....?
(चुभती कलम)
आजमगढ़। जनपद में प्रस्तावित रिंग रोड अब सड़क कम और राजनीति का भूत ज्यादा बन चुका है। यह भूत ऐसा है कि कभी पूर्व की आत्मा उसमें समा जाती है जो कभी अपने राजनीतिक घर में ही अपने आप को पिलर पीड़ित बताते थे। वहीं वर्तमान उसकी परछाईं पकड़ कर फोटो खिंचवा लेते हैं। नतीजा राजनीति के गलियारे में “मैं-मैं” की ऐसी होड़ मची है कि आम जनता, यह समझ ही नहीं पा रही कि असल में सरदार कौन है और किसकी बात में दम है। पूर्व प्रतिनिधि जहां सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर रिंग रोड को अपनी दूरदृष्टि का प्रमाण बता रहे हैं, वहीं उनके तथाकथित स्थानीय पूर्व प्रतिनिधि भी सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर कह रहे हैं कि पूर्व में उन्होंने मुझसे पूछ कर यह कार्य प्रस्ताव में दिया था। इस मामले में सबसे बड़ी बात अब तक यह सामने आई है कि वर्तमान जनप्रतिनिधि ने मंत्री के साथ मुस्कुराती तस्वीरें साझा कर यह बताने की पुरजोर कोशिश की है कि रिंग रोड का भूत उन्हीं के इशारे पर नाच रहा है। वही मंत्री द्वारा वर्तमान प्रतिनिधि के लिए सोशल मीडिया पर किये गये टैग की स्क्रीनशॉट को वायरल कर वर्तमान प्रतिनिधि की पूरी टीम रिंग में नाच रहे रोड पर बंदर को अपना बता रही है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि अभी तक किसी को यह नहीं पता कि रिंग रोड का असली सरदार कौन है। कोई खुद को सूत्रधार बता रहा है, कोई खुद को सूत्र बता रहा है। असरदार कौन है, यह तय कैसे हो। फिलहाल रिंगरोड के “मास्टर” की चाबुक ऐसी चली कि सोशल मीडिया का पूरा मैदान भर गया। रिंग में बंदर की तरह नचाए जा रहे पोस्ट, कमेंट और लाइव वीडियो यह साबित करने में लगे हैं कि असली खिलाड़ी कौन है और जनता तालियां पीट रही है। कुल मिलाकर, आजमगढ़ में रिंग रोड विकास का रास्ता कम और राजनीतिक अखाड़ा ज्यादा बन चुका है, इस राजनीतिक द्वंद्व का पटाक्षेप तभी ही सकता है जब रिंग के मास्टर स्वयं चाबुक घुमाते हुए रिंग में रोड पर नाचते हुए लोगों में किसी एक को जीत का ताज स्वयं अपने हाथ से पहना दे। फिलहाल विजेता जो भी हो इस पर चर्चा से ज्यादा इस बात की जनता में खुशी है कि आजमगढ़ में रिंग रोड बनने जा रहा है जो आजमगढ़ के विकास को गति देगा। रही बात राजनीति की तो नेता होते ही हैं इसके लिए, बाकी जनता जनार्दन के हाथ...! (साभार : आजमगढ़ के समस्त पूर्व और वर्तमान नेता, प्रतिनिधि व राजनीतिक दल)।

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