आजमगढ़ : एसकेडी विद्या मंदिर व इंटर कॉलेज में श्रद्धा और राष्ट्रभाव के साथ मना बसंत पंचमी उत्सव

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माँ सरस्वती पूजन के साथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम
तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा जैसे ओजस्वी नारे ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी-विजय बहादुर सिंह, संस्थापक
आजमगढ़। जहानागंज क्षेत्र के धनहुंआ स्थित एसकेडी विद्या मन्दिर एवं एसकेडी इण्टर कॉलेज में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर विद्या, विवेक और वाणी की देवी मां सरस्वती का विधिवत पूजन-अर्चन अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस शुभ अवसर पर आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे परिसर को भक्ति, उमंग और संस्कारों की सुगंध से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम के दौरान नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह में देशभक्ति और राष्ट्रचेतना की अलख जगा दी। विद्यार्थियों की ओजस्वी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। एसकेडी विद्या मन्दिर में संस्थापक विजय बहादुर सिंह द्वारा मां सरस्वती एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अपने प्रेरक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी का पर्व ऋतु परिवर्तन के साथ नई ऊर्जा, सृजन और चेतना का संदेश देता है। जब प्रकृति पुष्पों से सजी होती है, तब मां सरस्वती की आराधना से मन, बुद्धि और आत्मा आलोकित होती है। नेताजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा जैसे ओजस्वी नारे ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिला दीं, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें भारत छोड़ना पड़ा। विद्यालय के प्रधानाचार्य के.के. सरन ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आयुशी, रेशमी, आराध्या, अमृता, भार्गवी, मानसी सहित अन्य छात्राओं की प्रस्तुतियां विशेष रूप से सराही गईं। वहीं एसकेडी इण्टर कॉलेज में श्रीकान्त सिंह एवं प्रधानाचार्य यू.सी. मिश्र द्वारा मां सरस्वती व नेताजी के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। यहां अंशिका, आकृति, रेशू, आनन्दी, अकांक्षा, रितिका सहित विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम की सफलता में योगेश अस्थाना, अनंत, योगेन्द्र, रंजना, ममता, अल्का, अनीता सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों का योगदान सराहनीय रहा।

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