सरकार ने सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री किया निलंबित

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इस्तीफे और बयानों से प्रशासनिक हलकों में मचा भूचाल
यूजीसी और माघ मेले की घटना के विरोध में दिया था इस्तीफा, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
बरेली। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को प्रदेश सरकार ने निलंबित कर दिया है। उन्हें शामली स्थित कलेक्टर कार्यालय से अटैच किया गया है। पूरे प्रकरण की जांच मंडलायुक्त, बरेली को सौंपी गई है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इससे पहले सोमवार को, गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के दिन, सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। उनका यह इस्तीफा प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद एवं उनके शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट की घटना के विरोध में बताया गया। अलंकार अग्निहोत्री ने राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजे गए सात पृष्ठों के इस्तीफे में तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा कि अब केंद्र और राज्य में न जनतंत्र बचा है और न ही गणतंत्र, बल्कि “भ्रमतंत्र” रह गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश में अब देशी नहीं, बल्कि “विदेशी जनता पार्टी” की सरकार चल रही है। इसके साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए कानून का भी खुलकर विरोध किया। अपने पत्र में उन्होंने स्वयं को उत्तर प्रदेश सिविल सेवा, वर्ष 2019 बैच का राजपत्रित अधिकारी बताते हुए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने का उल्लेख किया है। उन्होंने प्रयागराज माघ मेले की घटना का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या स्नान के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, बटुकों और ब्राह्मणों के साथ स्थानीय प्रशासन ने मारपीट की। आरोप है कि एक बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर उसकी शिखा पकड़कर घसीटा गया, जिससे उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक मर्यादा का हनन हुआ। अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि वह स्वयं ब्राह्मण वर्ग से हैं और इस घटना ने उन्हें भीतर तक आहत किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना ब्राह्मण विरोधी मानसिकता को दर्शाती है और साधु-संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ है। इसी बीच सोमवार को उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें वह पोस्टर लेकर खड़े दिखाई दे रहे हैं। पोस्टर पर लिखा था— “#UGC Rollback, काला कानून वापस लो। शंकराचार्य और संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।” सोमवार शाम को अलंकार अग्निहोत्री डीएम आवास पहुंचे, जहां वह करीब एक घंटे तक रहे। बाहर निकलने के बाद उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें डीएम आवास पर लगभग 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान उन्होंने सचिव दीपक पांडेय को फोन कर अपनी स्थिति से अवगत कराया। उनका कहना है कि कॉल किए जाने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीएम अविनाश सिंह एक लखनऊ स्थित अधिकारी से स्पीकर पर बात कर रहे थे, तभी उस अधिकारी ने उनके लिए अपशब्दों का प्रयोग किया। अलंकार अग्निहोत्री ने इसे एक सोची-समझी साजिश बताया और कहा कि उन्हें रातभर आवास में रोकने की योजना थी।इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी आवास खाली करने के लिए अपने समर्थकों को बुलाया है। उनके समर्थक वहां पहुंचने लगे हैं, जिससे स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।

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