आजमगढ़ : चार मासूमों की मौत से बिलख उठा कुशलगांव, चहुंओर हाहाकार

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रिपोर्ट : वेद प्रकाश सिंह 'लल्ला'


आजमगढ़। चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन दीदारगंज क्षेत्र के ग्राम कुशलगांव में पानी से भरे तालाब में डूबने से चार मासूम बच्चों की मौत ने इलाके के लोगों को हिला कर रख दिया है। एक तरफ जहां इस घटना से क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है वहीं हादसे में मृत बच्चों के परिवार में चीख-पुकार मची हुई है। गांव में भी मातम छाया हुआ है। गरीबी जो न करा दे: इन दिनों गेंहू के फसल की मड़ाई का कार्य जोरों पर है। ऐसे में हार्वेस्टर मशीन से फसलों की कटाई चल रही है। इस दौरान खाली खेत में गिरी गेहूं की बालियां बटोरने के लिए तमाम गरीब परिवारों के लोग बच्चों के साथ जुटे हैं। खेत में गिरी गेहूं की बालियां बटोरने के लिए बुधवार को दिन में ग्राम कुशलगांव की दलित बस्ती के तीन परिवारों के बच्चे भी स्कूल न जाकर भूख मिटाने के लिए गेहूं की बालियां इकट्ठा करने के लिए अपने घरों से बोरी लेकर गांव के उत्तरी सीवान की ओर भाग कर पहुंचे। इन बच्चों में दिल्ली कमाने गए कमलेश गौतम की तीन संतानों में बड़ा बेटा 11 वर्षीय राजकुंवर उर्फ समर एवं मंझला सात वर्षीय रामकमल उर्फ कल्लू के साथ ही कमाने की गरज से आज ही दिल्ली के लिए रवाना हुए लौटन राम का आठ वर्षीय पुत्र यश तथा जिविकोपार्जन के लिए मुंबई में रहने वाले जयचंद गौतम का छह वर्षीय इकलौता पुत्र यश सभी घर से एक साथ निकले थे। गेहूं की बालियां इकट्ठा करने के बाद सभी लड़के दलित आबादी से लगभग 400 मीटर दूर स्थित तालाब की ओर बढ़े। वहां सभी ने तालाब के किनारे अपने कपड़े और इकट्ठा किए गए खाद्यान्न रखकर नहाने की गरज से पानी में उतरे लेकिन बाहर नहीं निकल सके। शाम करीब पांच बजे पशुओं को लेकर तालाब की ओर गए चरवाहों ने किनारे पर मौजूद कपड़ों आदि को देख गांव वालों को आवाज दी। शोर सुनकर गांव के लोग भागकर मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से आनन-फानन तालाब से पानी में समाए सभी बच्चों को बाहर निकाला गया और तत्काल उन्हें फुलेश बाजार में एक चिकित्सक के यहां ले जाया गया। उसके द्वारा हाथ खड़े कर देने पर निर्जीव हो चुके बच्चों को नजदीकी बाजार खेतासराय ले जाया गया लेकिन वहां भी चिकित्सक ने बच्चों की हालत गंभीर बताते हुए सभी को जौनपुर जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। वहां मौजूद एसओ दीदारगंज अखिलेश कुमार की मदद से बच्चों को सरकारी एंबुलेंस से जौनपुर जिला अस्पताल ले जाया गया। यहां भी साथ गए लोगों को तब निराशा हाथ लगी जब चिकित्सक ने सभी को मृत घोषित कर दिया। शवों को लेकर परिवार के लोग रोते बिलखते गांव लौटे तो एंबुलेंस से एक साथ मासूम बच्चों के शवों को देख गांव में हाहाकार मच गया। अपने लाल को निर्जीव हालत में शव से लिपट कर रो रही माताओं का करुण क्रंदन लोगों की आंखों को नम कर देने के लिए काफी था।

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