आजमगढ़ : पाताल में समा गया महिला पीजी कालेज

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अस्तित्वविहीन शिक्षा के मंदिर को ढूंढ रहा विश्वविद्यालय प्रशासन
आजमगढ़। देश में शिक्षा का निजीकरण होने के बाद धनकुबेरों की नजर इस क्षेत्र पर गड़ी और उन्होंने इसे व्यवसाय में तब्दील कर दिया। नतीजा की देश में उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले लाखों बेरोजगार युवकों की फौज खड़ी हो गई। देश व प्रदेश की सरकारें इस गंभीर समस्या पर मौन साध गईं। जिसका परिणाम आज लोगों के सामने हैं। इस क्षेत्र से जुड़े शिक्षा माफिया नकल के दम पर युवा पीढ़ी को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं। इसका प्रमाण जुलाई माह में पूर्वांचल विश्वविद्यालय द्वारा संचालित कराई जा रही स्नातक परीक्षाओं के दौरान सामने आया। जनपद के जहानागंज क्षेत्र में पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध एक महिला पीजी कालेज का अस्तित्व केवल कागजों पर दिखा। धरातल पर उक्त विद्यालय कोई छात्र प्रवेशित नहीं कर सका है। सूत्रों के अनुसार जहानागंज क्षेत्र के रामपुर ग्रामसभा में स्थित एक महिला पीजी कालेज का संचालन कोरे कागज पर हो रहा है। जिस स्थान पर इस कालेज को स्थित होना बताया गया है। उस स्थान पर फार्मेसी कालेज बना हुआ है। नियमतः डिग्री कॉलेज के कैम्पस में फार्मेसी कॉलेज नही खुल सकता दोनों का कैम्पस अलग अलग होना चाहिए, किन्तु दोनों कॉलेज एक ही कैम्पस में हैं, हैरानी वाली बात यह कि इस कालेज में शिक्षार्जन करने वाले छात्र-छात्राओं के को परीक्षा देने के लिए क्षेत्र के जिस कालेज को परीक्षा केंद्र बनाया गया है, उसी के प्रबंध समिति द्वारा इस विद्यालय का संचालन किया जाना बताया जा रहा है। सबसे हैरान कर देने वाली बात यह कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा बनाई गई जिस समिति द्वारा कालेज का स्थलीय निरीक्षण किया उस टीम का भ्रष्टाचार में लिप्त होने पर बल मिलता है। सुविधा शुल्क के दम पर जिले में अभी कितने अस्तित्व विहीन कालेजों का मामला उजागर होगा यह अभी भविष्य के गर्भ में है।

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