प्रदेश के 25 पीपीएस अफसरों का रूका प्रमोशन

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प्रांतीय पुलिस सेवा संघ (पीपीएस) ने नवागत डीजीपी मुकुल गोयल के सामने बयां की अपनी पीड़ा
लखनऊ। अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) क43 पद पिछले एक साल से रिक्त हैं और 25 पीपीएस अफसर सभी अर्हताएं पूरी कर रहे हैं लेकिन डीपीसी के लिए शासन को प्रस्ताव ही नहीं भेजा गया। एएसपी के ये पद ग्रेड पे-7600 (लेवल-12) के हैं। यह पीड़ा गुरुवार को प्रांतीय पुलिस सेवा संघ (पीपीएस) ने नवागत डीजीपी मुकुल गोयल के सामने बयां की। संघ के पदाधिकारियों ने डीजीपी को चार सूत्रीय ज्ञापन देते हुए कहा कि समूचे पीपीएस कैडर में निराशा व अवसाद की स्थिति है। डीजीपी ने समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद एडीजी प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
ज्ञापन में कहा गया है कि पीपीएस कैडर के कैडर रिव्यू का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, जिस पर पांच मार्च 2021 को अपर मुख्य सचिव गृह की अध्यक्षता में कार्मिक व वित्त विभाग के अधकारियों के साथ विचार-विमर्श हुआ था। विचार-विमर्श के बाद कैडर रिव्यू के प्रस्ताव को पदों का औचित्य अंकित करते हुए उन्हें भेजने के लिए निर्देशित किया गया था। बावजूद इसके अभी तक शासन को दोबारा प्रस्ताव नहीं भेजा गया। इसी तरह आईपीएस कैडर रिव्यू जो 31 दिसंबर 2019 तक हो जाना चाहिए था, वह विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श के बाद भी लंबित है।
इस कारण पीपीएस के काफी अधिकारी आईपीएस कैडर में प्रोन्नत नहीं हो पा रहे हैं। संघ के ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है। इस संशोधन के अभाव में अपर पुलिस अधीक्षक लेवल-12 पर अधिकारियों की प्रोन्नति नहीं हो पा रही है। प्रतिनिधिमंडल में संघ के अध्यक्ष दिनेश यादव व वरिष्ठ उपाध्यक्ष जय प्रकाश सिंह के अलावा विनय चंद्रा, हबीबुल हसन, बबिता सिंह व हृदेश कठेरिया शामिल थे।

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