इंस्पेक्टर ने दुष्कर्म पीड़िता से की अश्लील सौदेबाजी

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चार्जशीट के नाम पर मिलने का दबाव; वायरल ऑडियो की पुष्टि के बाद एसपी ने की सख्त कार्रवाई
बलिया। जनपद के उभांव थाना क्षेत्र से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करने वाला गंभीर मामला सामने आया है। यहां तैनात ‘इंस्पेक्टर क्राइम’ नरेश मलिक पर दुष्कर्म पीड़िता की मजबूरी का फायदा उठाने और अश्लील बातचीत करने का आरोप लगा है। मामला संज्ञान में आते ही पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी इंस्पेक्टर के साथ ही थाना प्रभारी निरीक्षक संजय शुक्ल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि रसड़ा कोतवाली क्षेत्र की एक महिला ने उभांव थाने में तैनात एक वन दारोगा के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी दारोगा को जेल भेज दिया था। इसी मुकदमे की विवेचना और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया के दौरान इंस्पेक्टर नरेश मलिक ने पीड़िता से संपर्क बढ़ाया। आरोप है कि इंस्पेक्टर ने फोन पर पीड़िता से अश्लील बातें करनी शुरू कर दीं और चार्जशीट जल्द लगाने के नाम पर मिलने का दबाव बनाया। वायरल ऑडियो और पीड़िता की शिकायत के अनुसार, इंस्पेक्टर ने कहा, “मुझसे मिल लो, दो मिनट में चार्जशीट लग जाएगी।” इसे लेकर उसने कथित तौर पर अशोभनीय सौदेबाजी की कोशिश की। पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड कर लिया और उच्चाधिकारियों को भेजकर न्याय की गुहार लगाई। मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने पहले एक अप्रैल को इंस्पेक्टर को उभांव थाने से हटाकर साइबर सेल में स्थानांतरित कर दिया था, ताकि वह जांच को प्रभावित न कर सके। पूरे प्रकरण की जांच क्षेत्राधिकारी रसड़ा आलोक गुप्ता को सौंपी गई थी। जांच में वायरल ऑडियो की पुष्टि होने के बाद एसपी ओमवीर सिंह ने इंस्पेक्टर नरेश मलिक और थाना प्रभारी संजय शुक्ल को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। एसपी ओमवीर सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और ऑडियो के आधार पर जांच कराई गई, जिसमें इंस्पेक्टर की बातचीत को अशोभनीय और पद की गरिमा के विपरीत पाया गया। प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही क्षेत्राधिकारी रसड़ा को निर्देशित किया गया है कि पीड़िता से संपर्क कर पूरे मामले में वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।

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