आजमगढ़ से उठा सियासी जवाब: ‘चाय’ और ‘गाय’ पर बयानबाज़ी ने पकड़ा तूल

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सयानी घोष के तंज पर पूजा सिंह का पलटवार, यूपी बनाम बंगाल की सियासत हुई तेज
आजमगढ़। संसद में दिए गए एक बयान के बाद ‘चाय’ और ‘गाय’ को लेकर शुरू हुई सियासी बयानबाज़ी अब तेज होती जा रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद सयानी घोष के तंज पर उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से राष्ट्रीय सनातन सेना की प्रदेश अध्यक्ष पूजा सिंह ने कड़ा पलटवार किया है, जो अब सुर्खियों में है। बताया जा रहा है कि हाल ही में सयानी घोष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए ‘चाय’ से जुड़ा बयान दिया था, जो आगे ‘गाय’ तक पहुंच गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूजा सिंह ने कहा कि “गाय का दूध है, तभी सबके कप में चाय है,” और इसके साथ ही उन्होंने अपने संबोधन में लोकतंत्र, सनातन और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। पूजा सिंह ने आजमगढ़ की धरती से संबोधित करते हुए कहा कि “इस देश में एक चाय बेचने वाला भी प्रधानमंत्री बन सकता है, यही लोकतंत्र की ताकत है।” उन्होंने आगे कहा कि “गाय हमारे लिए सिर्फ मुद्दा नहीं, बल्कि संस्कार और आस्था का प्रतीक है।” अपने बयान में उन्होंने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया, जबकि केंद्र सरकार की योजनाओं का हवाला देते हुए किसानों और समाज के हित में काम करने की बात कही। पूजा सिंह के इस बयान के दौरान समर्थकों ने “जय श्री राम” और “हर-हर महादेव” के नारे भी लगाए। उनके इस तीखे तेवर के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है और उन्हें एक उभरती ‘फायर ब्रांड’ नेता के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद सियासी माहौल में यूपी और बंगाल के बीच बयानबाज़ी का रंग भी देखने को मिल रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद अब केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि क्षेत्रीय अस्मिता और विचारधारा की लड़ाई का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

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