किसान संगठनों व नागरिक समाज ने निकाला जुलूस, राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा
आजमगढ़-निजामाबाद। यूजीसी इक्विटी नियमावली लागू करने, जाति जनगणना कराने और न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की मांग को लेकर किसान संगठनों व नागरिक समाज के लोगों ने जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने तहसील गेट पर सभा कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी निजामाबाद को सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने 'यूजीसी रेगुलेशन लागू करो', 'जाति जनगणना कराओ', 'न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व की गारंटी करो', 'रोहित वेमुला अमर रहें', 'पायल तड़वी अमर रहें' जैसे नारों के साथ तहसील गेट पर सभा की। इस दौरान जनकवि काशीनाथ यादव ने गीत के माध्यम से सरकार से यूजीसी कानून शीघ्र लागू करने की मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसे में उच्च शिक्षण संस्थानों को जातिगत भेदभाव व उत्पीड़न से मुक्त बनाने के लिए यूजीसी इक्विटी नियमावली लागू करना न्यूनतम लेकिन जरूरी कदम है। सभा में वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए ठोस व सुसंगत नीतियां बनाने हेतु जाति जनगणना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि जाति जनगणना की घोषणा के बावजूद जारी जनगणना फॉर्म में जाति का कॉलम नहीं है, जिसे सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वक्ताओं ने न्यायपालिका में सामाजिक विविधता के अभाव पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि संविधान पीठों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों का अनिवार्य प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए तथा न्यायपालिका में इन वर्गों के प्रतिनिधित्व की गारंटी होनी चाहिए। सभा को किसान नेता राजीव यादव, वीरेंद्र यादव, पूर्व फौजी चंद्रेश यादव, कलीम जामई, अधिवक्ता रामचेत यादव, सत्यम प्रजापति, डॉ. राजेंद्र यादव, अधिवक्ता चंद्रेश राम और नदीम अहमद समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। अस्वस्थ होने के बावजूद कामरेड हरिमंदिर पाण्डेय ने पहुंचकर समर्थन दिया। सभा का संचालन सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव ने किया।




