मऊ : सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मिलेगा कैशलैस इलाज, डीएम ने दिए तत्काल उपचार के निर्देश

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सीटीआरएबी 2025 के तहत डेढ़ लाख रुपये तक मुफ्त इलाज, गोल्डन आवर पर विशेष जोर
राहगीर योजना से घायलों को अस्पताल पहुंचाने वालों को मिलेगा 25 हजार का पुरस्कार
रिपोर्ट : राहुल पांडेय
मऊ। जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने कलेक्ट्रेट सभागार में समस्त पंजीकृत सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों तथा सड़क दुर्घटना हॉटस्पॉट के नजदीकी अस्पतालों के चिकित्सकों के साथ कैशलैस ट्रीटमेंट ऑफ रोड एक्सीडेंट विक्टिम्स स्कीम (सीटीआरएबी–2025) को लेकर बैठक की। इस दौरान योजना से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाने पर विस्तृत चर्चा की गई।जिलाधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार की इस योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति का इलाज किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में डेढ़ लाख रुपये तक अथवा एक सप्ताह तक कैशलैस किया जाएगा। इलाज का खर्च जिला सड़क सुरक्षा समिति द्वारा वहन किया जाएगा। उन्होंने सभी अस्पतालों को निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटना में घायलों का तत्काल इलाज सुनिश्चित किया जाए और खर्च की चिंता न करें। उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद गोल्डन आवर में इलाज शुरू होने से कई जानें बचाई जा सकती हैं। साथ ही स्वास्थ्य अधीक्षकों को निर्देश दिए कि यदि घायल की सहमति हो तो उसे तुरंत अच्छे निजी अस्पतालों में रेफर किया जाए, ताकि प्राथमिकता के आधार पर जीवन रक्षा की जा सके। बैठक में राहगीर योजना की भी जानकारी दी गई। जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों को तुरंत अस्पताल पहुंचाएं। घायलों को अस्पताल लाने वालों से कोई पूछताछ नहीं होगी और न ही उन्हें किसी कानूनी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ऐसे लोगों को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए अस्पतालों को घायलों को लाने वाले व्यक्तियों का पूरा विवरण रखने के निर्देश दिए गए। गत वर्ष की सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा करते हुए डीएम ने बताया कि 45 प्रतिशत से अधिक मौतें बाइक चालकों की होती हैं, जिनमें 60 प्रतिशत से अधिक 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के होते हैं। ओवरस्पीडिंग लगभग 70 प्रतिशत दुर्घटनाओं का मुख्य कारण है, जबकि हेलमेट न पहनना मौत की बड़ी वजह बनता है। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में मरने वाले अधिकतर लोग समाज के उत्पादक वर्ग से होते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। बैठक में शारदा नारायण हॉस्पिटल के डॉक्टर संजय सिंह ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में अधिकतर मौतें सिर में गंभीर चोट लगने से होती हैं। सिर में हल्की चोट (कनक्शन), स्कल फ्रैक्चर और मस्तिष्क में खून का थक्का (हेमेटोमा) जानलेवा साबित हो सकता है, इसलिए ऐसी चोटों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पुलिस अधीक्षक इलमारन जी ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर किए जा रहे प्रयासों से पिछले माह दुर्घटनाओं में कमी आई है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग समन्वय के साथ टीम भावना से काम करें तो सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। बैठक में सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता, एसीएमओ डॉ. आर.एन. सिंह, महिला चिकित्सालय की सीएमएस सहित समस्त स्वास्थ्य अधीक्षक एवं जनपद के प्रमुख अस्पतालों के चिकित्सक उपस्थित रहे।
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