आजमगढ़ के पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी पर दर्ज हुआ मुकदमा

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छः अन्य लोगों को भी बनाया गया आरोपी
आजमगढ़/उत्तराखंड। आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी पर वक्फ की संपत्ति खुर्द-बुर्द करने और जाली दस्तावेजों से जमीन की खरीद फरोख्त के आरोप में भवाली थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। वक्फ सचिव की शिकायत पर छः अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। वक्फ सचिव हशमत अली ने तहरीर देकर डंपी और अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस को मिली तहरीर के मुताबिक विसारतगंज रामगढ़ में वक्फ की 28 एकड़ (532 नाली दो मुट्ठी) जमीन है। जमीन वक्फ के नाम खसरा नम्बर में भी रजिस्टर्ड है। आरोप है कि आलिया डेवलपर्स के स्वामी पूर्व सांसद अकबर अहमद डंपी ने फर्जी दस्तावेज लगाकर भूमि अपने नाम कर ली। इसमें उनके कुछ स्थानीय साथी भी शामिल हैं। वक्फ सचिव ने हल्द्वानी के आशीष गुप्ता, रामनगर के चंदन सिंह के अलावा राजेन्द्र सिंह बिष्ट, हेमंत सिंह बिष्ट, हेमंत सिंह ढैला, मोहन बहादुर पर भी वक्फ की भूमि की गलत तरीके से खरीद-बिक्री करने के आरोप लगाए हैं। वक्फ सचिव की तहरीर के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की विभन्न धाराओं और वक्फ अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की जांच की जा रही है। वक्फ सचिव हसरत अली की ओर से संपत्ति को खुर्द बुर्द करने की शिकायत उपनिबन्धक कार्यालय नैनीताल में की थी। उपनिबंधक की जांच के बाद सामने आया कि दिसम्बर 2018 में तिकोनिया निवासी आशीष गुप्ता ने चन्दन सिंह निवासी धानाचूली से 900 वर्ग मीटर भूमि खरीदी थी। वहीं, राजेन्द्र सिंह बिष्ट ने हेमन्त सिंह बिष्ट से सितम्बर 2017 में एक नाली आठ मुट्ठी जमीन खरीदी। इसके अलावा मोहन बहादुर सिंह ने हेमन्त सिंह ढेला को 2 नाली 9 मुट्ठी भूमि उपहार के रूप में दे दी। आरोप है कि यह सभी भूमि वक्फ की संपत्ति थी। जिसके बाद अन्य छह के खिलाफ भी मुकदमे की कार्रवाई की गई। अकबर अहमद डंपी और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ वक्फ सचिव ने पुलिस को तहरीर दी है। सभी आरोपियों के खिलाफ भवाली थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच तत्काल शुरू कर दी गई है।
अकबर अहमद डंपी वर्ष 1980 में हल्द्वानी विधानसभा (यूपी) से विधायक और वर्ष 1998 और 2008 में संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ से सांसद चुने गये। डंपी का जन्म वर्ष 1948 में लखनऊ में हुआ था। उनके पिता इस्लाम अहमद ने वर्ष 1971 में यूपी में आईजी के रूप में कार्य किया था। डम्पी का ग्राम बखुपर में कृषि फार्म है, जिसे इस्लाम फार्म के रूप में जाना जाता है। डंपी की पढ़ाई देहरादून के दून स्कूल में हुई। उन्हें संजय गांधी का करीबी माना जाता था। वर्ष 1980 में डम्पी को कांग्रेस के टिकट पर हल्द्वानी विधानसभा (तत्कालीन यूपी) से विधायक के रूप में चुना गया था। वर्ष 1982 में डंपी ने कांग्रेस छोड़ दी। संजय गांधी की विमान हादसे में मृत्यु के बाद मेनका गांधी के साथ मिलकर संजय विचार मंच बनाया। उसके बाद डंपी ने संजय विचार मंच से वर्ष 1984 में नैनीताल संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा। जिसमें उन्हें कांग्रेस के सत्येन्द्र चंद्र गुड़िया से शिकस्त खानी पड़ी। वर्ष 1987 में डंपी काशीपुर विधानसभा (तत्कालीन यूपी) से उपचुनाव जीते। वर्ष 1998 और 2008 में डम्पी बसपा के टिकट पर आजमगढ़ (यूपी) से सांसद रहे। कोरोना काल में डंपी किच्छा स्थित अपने कृषि फार्म पर रहे थे।

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