आजमगढ़: कुलपति के खिलाफ धरने पर बैठे प्रबन्धकों को मिला छात्रों का समर्थन

Youth India Times
By -
0

जमकर हुई नारेबाजी, गहमागहमी के बीच बुलानी पड़ी पुलिस
कुलपति और प्रबन्धकों के बीच देर तक वार्ता के बाद भी नहीं बनी बात
आजमगढ़। उप्र स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर आज शुक्रवार को कुलपति के कार्यालय के समक्ष अनिश्चित कालीन धरना शुरू कर दिया। बता दें कि 11 नवम्बर को एसोसिएशन के अध्यक्ष राजबहादुर सिंह के नेतृत्व में लगभग 175 महाविद्यालयों के प्रबन्धक कुलपति को अपनी मांगों के सापेक्ष एक ज्ञापन देने पहंुचे थे लेकिन उस दिन कुलपति नहीं मिले। प्रबन्धकों द्वारा अपनी मांगों का ज्ञापन रजिस्ट्रार को सौंप विश्वविद्यालय द्वारा वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर की परिनियमावली/शासनादेश के आदेश का अनुपालन न कर नियम विरुद्ध आदेश पारित किये जाने का विरोध किया। प्रबन्धकों द्वारा बताया गया कि कुलपति के इस रवैये से महाविद्यालयों के समक्ष विभिन्न समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं जो छात्रहित में तो बिल्कुल ही नहीं है। 

ज्ञापन के माध्यम से यह चेतावनी दी गई थी कि अगर हमारी मांगें नहीं मानी गई तो 2 दिसम्बर को लोकतांत्रित तरीके से धरना प्रदर्शन करेंगे। कुलपति द्वारा उप्र स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन की मांगों को अनसुना किये जाने के बाद आज विभिन्न महाविद्यालयों के प्रबन्धक कुलपति के कार्यालय के समक्ष आमरण अनशन शुरू कर दिये। इस दौरान डीएवी, शिब्ली, चण्डेश्वर, मालटारी, तेरही, कोयलसा सहित विभिन्न महाविद्यालयों के छात्रों ने प्रबन्धकों का समर्थन किया। इस दौरान छात्रों ने कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी लगाई। माहौल गरम होता देख विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मौके पर पुलिस भी बुला ली गई। देर शाम प्रदर्शन स्थल पर आकर एडीएम प्रशासन, एसडीएम और कुलपति आकर प्रबन्धकों से वार्ता किया। कुछ देर बाद एडीएम वहां से चले गये। एसडीएम और कुलपति के साथ प्रबन्धकों की काफी देर वार्ता चली लेकिन कुछ बिन्दुओं पर सहमति बनी और कुछ बिन्दुओं पर सहमति नहीं बन पाई। तालाबंदी और प्रदर्शन के मद्देनजर कुलपति ने कहा कि वे मामले में साक्ष्यों के आधार पर छात्रों और प्रबन्धकों पर कार्रवाई करेंगे।

प्रबन्धकों का आरोप है कि महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय आजमगढ़ के स्थापना के समय शासन द्वारा शासनादेश जारी किया गया था कि जब तक विश्वविद्यालय का स्वतः परिनियमावली नहीं बन जाती है तब तक वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर की परिनियमावली से कार्य किये जाने का आदेश दिया गया था, लेकिन कुलपति द्वारा मनमाने ढंग से बिना परिनियमावली के नियम विरुद्ध कार्यों का सम्पादन किया जा रहा है। जिसके चलते महाविद्यालयों को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
इस दौरान राजबहादुर सिंह अध्यक्ष, संदीप त्रिपाठी, सूर्यभान यादव जिलाध्यक्ष मऊ, राजेन्द्र यादव, विशाल यादव मोनू, हरिश्चन्द्र यादव, प्रमोद यादव, अजीत सिंह, अब्दुल्ला, देवनाथ यादव, अजय सिंह मिस्टर, उमाशंकर यादव, संजय राय, प्रभात रंजन सिंह, राजू सिंह, स्वतंत्र सिंह मुन्ना, नीरज राय, अवधेश यादव, रामकृष्ण यादव, सुशील कुमार सिंह, सुनील सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)