अपराधियों के हाथों सम्मानित किए गए एसीपी और डीसीपी साहब

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जमानत पर छुटे पूर्व बीजेपी जिला मंत्री नारायण सिंह भदौरिया और सजायाफ्ता मोनू पांडेय को थाने द्वारा किया गया था आमंत्रित
कानपुर। अब से कोई दो महीने ही बीते होंगे जब कानपुर पुलिस नोएडा से कुछ भाजपाई बदमाशों को पकड़कर लाई थी। यह वही बदमाश थे जिन्होने कानपुर साउथ के नौबस्था में एक गेस्ट हाउस में चल रही बर्थडे पार्टी से एक हिस्ट्रीशीटर को पुलिस की गिरफ्त से छुड़वाकर भागने में मदद की थी। इस मामले में पुलिस ने 19 लोगों पर मुकदमा कायम किया था, जिनमें सभी कई मुकदमों में वांछित चल रहे थे। इस सबके बाद बात आई-गई हो गई। लेकिन कानपुर में कल फिर से यही गुंडे रातों-रात चर्चा का विषय बन गये। दरअसल, कानपुर के बाबुपुरवा थाने में व्यापार मंडल की तरफ से पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने के कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कुछ माह पहले जमानत पर बाहर आए पूर्व बीजेपी जिला मंत्री नारायण सिंह भदौरिया और सजायाफ्ता मोनू पांडेय लाव-लश्कर के साथ थाने पहुंचा। इस कार्यक्रम में दोनों अपराधियों ने डीसीपी रवीना त्यागी और एसीपी अलोक सिंह का सम्मान किया।
मंगलवार 17 अगस्त को पूर्व बीजेपी जिला मंत्री नारायण सिंह भदौरिया और सजायाफ्ता मोनू पांडेय को जूही थाने में आमंत्रित किया गया था। इस मौके पर कई संगीन धाराओं के आरोपी लाव-लश्कर के साथ थाने पहुंचे। डीसीपी रवीना त्यागी, बाबूपुरवा एसीपी आलोक सिंह व जूही थानाध्यक्ष संतोष आर्या मौजूद थे, जिन्हें इन अपराधियों द्वारा सम्मानित किया गया। पूरे प्रकरण का वीडियो सोशल मीडिया में आने के बाद पुलिस अधिकारी मुंह छिपाते हुए थाने से बाहर निकल गये। पुलिस की हो रही किरकिरी सम्मान समारोह में नारायण भदौरिया ने एसीपी बाबूपुरवा को सम्मानित किया तो मोनू पांडेय ने आईपीएस व डीसीपी रवीना त्यागी को गुलदस्ता देकर नमस्कार कर उनसे आशीर्वाद लिया। इस दौरान मीडिया के कैमरे जैसे ही पुलिस और अपराधियों की दोस्ती पर पड़े तो सभी मुंह छिपाते हुए लुकते-बचते दिखने लगे। सम्मान देने वाले दोनों आरोपित भी भाग खड़े हुए।
गौरतलब है कि, नौबस्ता थाना क्षेत्र के उस्मानपुर में भाजपा दक्षिण जिला मंत्री नारायण सिंह भदौरिया का जन्मदिन एक निजी गेस्ट हाउस में मनाया जा रहा था। यहां वांछित अपराधी मनोज सिंह भी पहुंचा था, जिसकी सूचना पुलिस को लगी। नौबस्ता पुलिस वांछित चल रहे हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह को गिरफ्तार कर अपने साथ ले जाने लगी। इसकी सूचना जैसे ही नारायण भदौरिया को लगी तो वो अपने सामर्थकों के साथ सड़क पर पहुंचे और पुलिस की जीप को चारो ओर से घेर लिया और हिस्ट्रीशीटर को छुड़ा ले गया था। कौन है मनोज सिंह? बर्रा के हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह पर हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, बलात्कार जैसी गंभीर धाराओं में कुल 34 मुकदमे दर्ज हैं। बिठूर पुलिस ने उस पर 20 हजार का इनाम भी रखा हुआ था। मनोज को छुड़ाने के आरोप में पुलिस ने रणधीर सिंह तोमर, नारायण सिंह भदौरिया, रॉकी यादव और गोपाल शरण चैहान को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जिन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई थी। बीजेपी हाईकमान ने भदौरिया को पार्टी से बाहर कर दिया था। नारायण भदौरिया की हिस्ट्रीशीट भाजपा से निष्कासित नारायण भदौरिया पहले भी कई बार विवादों में रह चुका है, लेकिन पुलिस से साठगांठ व राजनीतिक रसूख के चलते पुलिस हाथ डालने से कतराती रही। नारायण के खिलाफ लखनऊ के गाजीपुर में धारा 307, 120ठ, किदवई नगर में 324, 323, 504 व इसी थाने में एक अन्य मुकदमा 308, 323, 504, 506 इसके साथ बाबूपुरवा में 323, 504, 506 की धाराओं में मुकदमा दर्ज हैं। पार्टी से निकाले जाने के बाद भी एक्टिव बीजेपी ने भले ही नारायण भदौरिया को पार्टी से बेदखल कर दिया है, लेकिन अभी पार्टी में उसका जलवा कम नहीं हुआ है। वह लगातार भाजपा में सक्रिय है।
दक्षिण उद्योग व्यपार मंडल का महामंत्री मोनू पांडेय का अपराध से पुराना नाता है। वर्ष 2004 में मोनू पांडेय के खिलाफ नौबस्ता थाने में हत्या जैसी गंभीर धारा में मुकदमा दर्ज है। सन 2004 में नौबस्ता थानांतर्गत आरबीआई कॉलोनी में रहने वाले वीरबल सिंह की हत्या के आरोप में मोनू पांडेय, राजवल्लभ पांडेय व विकास तिवारी जेल गए थे। जेल जाने के कुछ समय बाद मोनू पांडेय ने हाइकोर्ट से जमानत ले ली थी। जेल से आने के बाद मोनू राजनीतिक संरक्षण में आ गया था। क्ब्च् साहिबा का सम्मान करता मोनू पांडे (गोले में) पुलिस की सफाई अपराधियों और पुलिस के गठजोड़ की वीडियो व तमाम तस्वीरें बाहर आते ही वायरल होने लगीं।

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