पांच महीने पहले हो चुकी थी मौत, फिर भी ली 10 दिन की ट्रेनिंग
एआरटीओ ने जारी किया नोटिस, आरटीओ की काउंटर साइन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
बुलंदशहर। मुर्दे को ई-रिक्शा चलाता देख मचा हड़कंप! कागजों में मृत व्यक्ति ट्रेनिंग लेता रहा और प्रमाणपत्र भी हासिल कर लिया। मामला सामने आया तो जिम्मेदारों में खलबली मच गई। अब सवाल है कि आखिर यह ‘भूतिया ट्रेनिंग’ कैसे पूरी हो गई? मामला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का है, जहां ड्राइविंग ट्रेनिंग के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। स्याना क्षेत्र में कर उप परिवहन आयुक्त, मेरठ मंडल से मान्यता प्राप्त राजा मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल ने एक ऐसे व्यक्ति के नाम ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र जारी कर दिया, जिसकी कई महीने पहले ही सड़क हादसे में मौत हो चुकी थी। मामले के अनुसार, शेखुपुर रौरा निवासी सुखवीर के नाम 10 अगस्त 2025 को ई-रिक्शा की 10 दिवसीय ट्रेनिंग का सर्टिफिकेट जारी किया गया। प्रमाणपत्र में उल्लेख है कि सुखवीर ने 01 अगस्त से 10 अगस्त 2025 तक प्रशिक्षण प्राप्त किया। जारीकर्ता इमरान ने सर्टिफिकेट में यह भी प्रमाणित किया कि वह सुखवीर की ड्राइविंग क्षमता और शारीरिक फिटनेस से पूरी तरह संतुष्ट हैं, लेकिन हकीकत चौंकाने वाली है। जिस सुखवीर को ट्रेनिंग देने का दावा किया गया, उसकी 01 मार्च 2025 को सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी थी। इतना ही नहीं, 21 अप्रैल 2025 को जिला अस्पताल द्वारा उसका मृत्यु प्रमाणपत्र भी जारी किया जा चुका है। अब बड़ा सवाल यह है कि जो व्यक्ति पांच महीने पहले ही दुनिया छोड़ चुका था, उसे 10 दिन तक प्रशिक्षण किसने और कैसे दिया? सर्टिफिकेट किस आधार पर जारी हुआ? और सबसे अहम, आरटीओ (ट्रेनिंग) मेरठ की काउंटर साइन आखिर किन दस्तावेजों के आधार पर किए गए? इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ संबंधित ड्राइविंग स्कूल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था को भी कटघरे में ला खड़ा किया है। मामला उजागर होने के बाद एआरटीओ बुलंदशहर ने आरोपित ड्राइविंग स्कूल के प्रबंधक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अधिकारियों का कहना है कि स्पष्टीकरण मिलने के बाद नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।





