संघमित्रा तक पहुंची स्वामी के बयान की आंच

Youth India Times
By -
0

प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह चौधरी ने संघमित्रा से मांगा इस बात का जवाब
लखनऊ। स्वामी प्रसाद मौर्या द्वारा रामचरितमानस पर दिये गये आपत्तिजनक बयान की आंच उनकी बेटी व भाजपा सांसद संघमित्रा तक पहुंच गयी, संघमित्रा पर दबाव बढ़ने लगा है। भाजपा के टिकट पर सांसद बनीं संघमित्रा पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने रविवार को निशाना साधा। उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान को लेकर संघमित्रा से कहाकि भाजपा से सांसद होने के नाते उन्हें अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम को सुनने के लिए भूपेंद्र सिंह चौधरी मल्लावां ब्लाक के बूथ संख्या 262, 263 बरहुवां गांव पहुंचे। यहां उन्होंने बूथ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर 2024 के चुनाव पर चर्चा भी की। स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर उन्होंने कहा कि सपा को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। उन्होंने स्वामी प्रसाद की सांसद बेटी की चुप्पी पर भी जवाब मांगा। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सांसद संघमित्रा बताएं कि वह अपने पिता के साथ हैं या भाजपा की विचारधारा के साथ। उन्होंने कार्यकर्ताओं का 2024 के चुनाव के लिए जुटने का आह्वान किया। हालांकि भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्य ने पूरे मामले पर अपने पिता स्वामी प्रसाद मौर्य का बचाव किया है। संघमित्रा ने पिछले दिनों कहा कि पिता ने रामचरितमानस की जिस चौपाई का जिक्र करते हुए उसे आपत्तिजनक बताया है, उस पर विद्वानों के साथ चर्चा की जानी चाहिए।
संघमित्रा ने कहा कि जिन लोगों पिता के बयान पर आपत्ति हो रही है उन्हें पहले इसे सकारात्मक रूप से देखना चाहिए। जो व्यक्ति भगवान में नहीं, भगवान बुद्ध में विश्वास करता हो। भाजपा में पांच साल रहने के बाद भगवान राम में आस्था कर रहे हैं और रामचरितमानस को पढ़ा है। कहा कि हम लोग स्कूल से ही यह सीखते चले आ रहे हैं कि किसी तरह का डाउट हो तो उसे स्पष्ट करना चाहिए। ताकि आगे हमें किसी तरह की कोई दिक्कत न हो। पिता जी ने रामचरितमानस को पढ़ा और उस लाइन को शायद इसलिए कोट किया क्योंकि वह लाइन स्वयं भगवान राम के चरित्र के विपरीत है। जहां राम ने सबरी के झूठे बेर खाए और जाति को महत्व नहीं दिया। वहीं पर रामचरितमानस की उस लाइन में जाति का वर्णन किया गया है। कहा कि उस लाइन को अगर डाउट की दृष्टि से स्पष्टीकरण मांगा तो स्पष्टीकरण होना चाहिए। बहुत से विद्वान हैं और यह विषय मीडिया में बैठकर बहस का नहीं बल्कि विश्लेषण का विषय है। इस पर विद्वानों के साथ चर्चा होनी चाहिए। यह जानना चाहिए कि इस लाइन का अर्थ क्या है।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)